Wednesday, December 19, 2012

शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल.....

शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल :-
११५ वें जन्म दिवस पर शत शत नमन
राम प्रसाद 'बिस्मिल' (जन्म- 11 जून, 1897 उत्तर प्रदेश - मृत्यु- 19 दिसंबर, 1927) भारत के महान स्वतन्त्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाविद् व साहित्यकार भी थे जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिये अपने प्राणों की आहुति दे दी।

पंडित रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ का जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर ज़िले में 11 जून, 1897 को हुआ। यह वह समय था जब देश में राष्ट्रीय आन्दोलन ज़ोरों पर था। देश में ब्रिटिश हुक़ूमत के ख़िलाफ़ एक ऐसी लहर उठने लगी थी जो पूरे अंग्रेज़ी शासन को लीलने के लिए बेताब हो चली थी। बिस्मिल में भी बचपन से ही ब्रिटिश हुक़ूमत के ख़िलाफ़ एक गहरी नफ़रत घर कर गई। अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ान, चन्द्रशेखर आज़ाद, भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव और ठाकुर रोशनसिंह जैसे क्रांतिकारियों से सम्पर्क में आने के बाद आपने अंग्रेज़ों की नाक में दम करना शुरू कर दिया। ब्रिटिश साम्राज्य को दहला देने वाले काकोरी काण्ड को आपने ही अंजाम दिया था।

इतना ही नहीं अपनी क़लम के माध्यम से भी आप ब्रिटिश हुक़ूमत की आँख की किरकिरी बन गए। ‘सरफ़रोशी की तमन्ना’ जैसा अमर गीत लिखकर आपने क्रांति की वो चिंगारी छेड़ी जिसने ज्वाला का रूप लेकर ब्रिटिश शासन के भवन को लाक्षागृह में परिवर्तित कर दिया। राम प्रसाद बिस्मिल ने 'बिस्मिल अज़ीमाबादी' के नाम से भी काफ़ी शाइरी की। जीवन के अंतिम सफ़र में जब आपको गोरखपुर जेल भेजा गया तो आपने आत्मकथा भी लिखी।
19 दिसम्बर, 1927 को आपको देशभक्ति के अपराध में फाँसी दी गई।

जिसे पता हो की अगले दिन हमें मरना है, वह आत्मकथा लिख रहा हो, सोचिये, है न जिगरे की बात ! नमन ऐसे व्यक्तित्व को ! मुझे फक्र है कि इस चुम्बकीय व्यक्तित्व का परिचय भी उनकी आत्मकथा के माध्यम से जेल में ही हुआ ! कारावास के शुरूआती समय जो काटे नहीं कटते थे, बड़ी सहूलियत मिली ! जीवन की धारा ही बदल गयी ! लगा जिन्हें जेल में होना चाहिए वो तो बाहर घूम रहे हैं बहुतायत में, और जो बाहर हैं उन्हें जेल में होना चाहिए ! कम से कम हर इंसान को ६ मॉस का समय कारावास में बिताना चाहिए, जिंदगी के फलसफे आसान हो जायेंगे ! क्या आप जानते हैं बिस्मिल जी को जेल से फरार होने की सारी तैयारी पूरी होने के बाद, अवसर होते हुए भी बिस्मिल जी जेल से क्यों नहीं भागे ? क्यों कि जेलर साहब चोरी छिपे उन्हें लिखने पढ़ने के लिए सामग्री उपलब्ध कराते थे ! जेलर साहब बिस्मिल जी का बड़ा सम्मान करते थे ! उनकी तीन बेटियाँ शादी योग्य थीं ! ये बात बिस्मिल जी जानते थे ! वे जानते थे कि उनके फरार होते ही जेलर साहब पर गाज गिरेगी ! और बाकी का जीवन उनका बड़ा कष्टकारी बन जायेगा ! जिसके दिल में ऐसी करुणा हो, सोचिये ???? ऐसे महामानव को प्रणाम करता हूँ, अपनी भावांजलि दे कर !! बंगाल वाले ही बस स्वयं को क्रन्तिकारी समझते थे, बाकियों को ह्येह दृष्टि से देखते थे, जब कि जेल में एक रोटी के लिए मार करते थे, इन हालातों पर नियंत्रण करना बिस्मिल के जीवटपन का एक अनूठा उदहारण है!


आज क़ोई सरकारी अमला इनको याद नहीं कर रहा है ,,,,

जय बाबा बनारस।।।।

Tuesday, December 18, 2012

सबसे पुराना

हिन्दू धर्म (संस्कृत: सनातन धर्म) विश्व के सभी धर्मों में सबसे पुराना धर्म है। ये वेदों पर आधारित धर्म है, जो अपने अन्दर कई अलग अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्र......दाय, और दर्शन समेटे हुए है। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है, संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक भारत में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में है। इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है | हिन्दी में इस धर्म को सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहते हैं। इण्डोनेशिया में इस धर्म का औपचारिक नाम "हिन्दु आगम" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नही है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है " हिंसायाम दूयते या सा हिन्दु "[टंकणगत अशुद्धि?] अर्थात् जो अपने मन, वचन, कर्म से हिंसा से दूर रहे वह हिन्दू है और जो कर्म अपने हितों के लिए दूसरों को कष्ट दे वह हिंसा है। नेपाल विश्व का एक मात्र आधुनिक हिन्दू राष्ट्र था (नेपाल के लोकतान्त्रिक आंदोलन के पश्चात् के अंतरिम संविधान में किसी भी धर्म को राष्ट्र धर्म घोषित नहीं किया गया है।
क्या आप सब सहमत है।।।।

जय बाबा बनारस।।।। 

Wednesday, December 12, 2012

शादी की पहली रात....

शादी की पहली रात को नवविवाहित जोड़े ने तय किया की वो सुबह कोई भी बिना कारण दरवाजा खटखटाएगा तो वो दरवाजा नहीं खोलेंगे.
सुबह पति के माँ ने दरवाजा खटखटाया.
दोनों ने एक दूसरे को देखा.और रात में जैसा तय किया था उस अनुसार उन्होंने दरवाज़ा नहीं खोला.
थोड़ी देर बाद पत्नी के पिता ने दरवाजा खटखटाया.

दोनों ने फिर एक दूसरे की और देखा.
पत्नी के आँखों से आंसू बहने लगे और उसने रोना शुरू कर दिया.
बोली "मैं अपने पिता
को ऐसे ही दरवाज़ा खटखटाते नहीं छोड़ सकती, मैं पहले ही उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर आयी हूँ, उन्हें कितना दुःख होगा अगर मैंने दरवाज़ा नहीं खोला तो."
पति ने कुछ नहीं कहा, पत्नी ने दरवाजा खोल दिया.
कई साल बीत गए,
इस युगल के 5 बच्चे हुए, जिनमे से पहले 4 लड़के थे और आख़िरी लड़की.
जब लड़की ने जन्म लिया तो उस व्यक्ति को बहुत खुशी हुई, उसे ऐसा लगा जैसे उसे भगवान ने ज़िंदगी का सबसे बड़ा उपहार दिया है.
उसने काफी बड़ा जश्न मनाया, और कई लोगो को बुलाया.
जश्न के दौरान उससे एक व्यक्ति ने पूछा की क्यों वह बेटी होने के खुशी में इतना जश्न मना रहा है, जबकी किसी भी बेटे के जन्म पर उसने जश्न नहीं मनाया.
उसने जवाब दिया : "ये बेटी ही है जो हमेशा मेरे लिए दरवाजा खोलेगी, बेटों का क्या भरोसा!"

इस कहानी को खुद वास्तविकता में परखिये, बेटे माता-पिता को नज़रंदाज़ कर सकते हैं, किन्तु बेटी नहीं !


जय बाबा बनारस .....

Wednesday, December 5, 2012

सफलता का रहस्य....

सफलता का रहस्य..... 

एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है?

सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलो. दूसरे दि
न दोनों मिले. फिर सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया. लड़का बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा , लेकिन सुकरात ताकतवर थे और उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वह बेहोश नहीं होने लगा. फिर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की वो थी हाँफते-हाँफते तेजी से सांस लेना.

सुकरात ने पूछा ,” जब तुम वहाँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे?”

लड़के ने उत्तर दिया,”सांस लेना”

सुकरात ने कहा,” यही सफलता का रहस्य है. जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना की तुम सांस लेना चाहते थे तो वो तुम्हे मिल जाएगी” इसके अलावा और कोई रहस्य नहीं है.





जय बाबा बनारस ....

Thursday, November 8, 2012

अपनी उन्नति का मार्ग प्रशस्त करें



एक दिन एक किसान का गधा कुएँ में गिर गया । वह गधा घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि गधा काफी बूढा हो चूका था,अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वा
ला नहीं था;और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।

किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही गधे कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है,वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा । और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया।
सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे। तभी किसान ने कुएँ मेंझाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया। अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह गधा एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था। वहहिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कद
म बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एस सीढी ऊपर चढ़ आता । जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह गधा कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया।

ध्यान रखो ,तुम्हारे जीवन में भी तुम पर बहुत तरह कि मिट्टी फेंकी जायेगी ,बहुत तरह कि गंदगी तुम पर गिरेगी। जैसे कि ,आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही तुम्हारी आलोचना करेगा,कोई तुम्हारी सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला बुरा कहेगा । कोई आपसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो आपके आदर्शों के विरुद्ध होंगे। ऐसे में आपको हतोत्साहित होकर कुएँ मेंही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हिल-हिल कर हर तरह कि गंदगीको गिरा देना है और उससे सीख लेकर,उसे सीढ़ी बनाकर,बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है।

अतः याद रखे !जीवन में सदा आगे बढ़ने के लिए--

१)नकारात्मक विचारों को उनके विपरीत सकारात्मक विचारों से विस्थापित करते रहें ।
२)आलोचनाओं से विचलित न हो बल्कि उन्हें उपयोग में लाकर 

एक दिन एक किसान का गधा कुएँ में गिर गया । वह गधा घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि गधा काफी बूढा हो चूका था,अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वा
ला नहीं था;और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।

किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही गधे कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है,वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा । और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया।
सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे। तभी किसान ने कुएँ मेंझाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया। अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह गधा एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था। वहहिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कद
म बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था।

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एस सीढी ऊपर चढ़ आता । जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह गधा कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया।

ध्यान रखो ,तुम्हारे जीवन में भी तुम पर बहुत तरह कि मिट्टी फेंकी जायेगी ,बहुत तरह कि गंदगी तुम पर गिरेगी। जैसे कि ,आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही तुम्हारी आलोचना करेगा,कोई तुम्हारी सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला बुरा कहेगा । कोई आपसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो आपके आदर्शों के विरुद्ध होंगे। ऐसे में आपको हतोत्साहित होकर कुएँ मेंही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हिल-हिल कर हर तरह कि गंदगीको गिरा देना है और उससे सीख लेकर,उसे सीढ़ी बनाकर,बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है।

अतः याद रखे !जीवन में सदा आगे बढ़ने के लिए--

१)नकारात्मक विचारों को उनके विपरीत सकारात्मक विचारों से विस्थापित करते रहें ।
२)आलोचनाओं से विचलित न हो बल्कि उन्हें उपयोग में लाकर अपनी उन्नति का मार्ग प्रशस्त करें |


-स्वामी अमृतानंद जी
 — 
जय बाबा बनारस।।।

Friday, November 2, 2012

करवाचौथ का भी 'कल्याण'


इस शौक और चलन को क्या कहिये? आज कुंवारी लड़कियां ब्वाय फ्रेंड के लिए व्रत रख रही हैं। सुना है ये साल में किसी को भी, सालों में न जाने कितनों के लिए भी व्रत रख लेती हैं..? मेरी नजर में ये करवाचौथ जैसे तमाम पर्वो की गंगा को मैला करने की निकृष्टतम कोशिश है। इसमें कोई खुश हो सकता है तो वो है बाजार। क्योंकि, उसपर दौलत बरसती है। कोई कुर्बान होता है तो वो है समर्पण और प्रेम, जबकि यही करवाचौथ का मूल है। हमें ताज्जुब होता है ये देखकर कि जो त्योहार कभी बंद कमरों और गुपचुप मनाया जाता था, आज होटलों में मन रहा है। मेरे ख्याल से ये बदलाव महिलाओं के आर्थिक रूप से सशक्त होने से नहीं हुआ। ये चलन तो व्यापार और फैशन से है। बाजार की ताकतें ही अब दुनिया चला रही हैं।
दरअसल, हिंदुस्तान के तमाम पर्वो की तरह बाजारवाद व भूमंडलीकरण ने करवाचौथ का भी 'कल्याण' कर दिया है। बड़ी हैरानी होती है जब 25-30 साल पीछे जाकर सोचता हूं। ..हिंदुस्तान की पढ़ी-लिखी, नौकरीपेशा महिलाएं करवाचौथ मनाने की परंपरा को पिछड़ापन घोषित करती थीं और पुरुष विशेष के लिए पूरे दिन भूखे रहने को 'मरना' कहती थीं। आज की अधिकतर महिलाएं करवाचौथ को मनाकर, सबको बताने-दिखाने में, अपनी पहचान और शान मानती हैं। मेरा मानना है कि प्रेम और भक्ति तो एकांतिक और वैयक्तिक चीजें हैं। ये उछल-कूदकर, नाच-गाकर, दुनियाभर को दिखाने-बताने की चीज नहीं है। आधुनिक दिखने-बनने के इस नशे ने केवल चमक-दमक ही शेष छोड़ी है। पर्व के मूल के भाव को क्षीण किया है। ये आधुनिकता का प्रभाव है कि आज घर में मेहंदी रचाने की तैयारी नहीं होती। न बढि़या मेहंदी रचने वाली महिलाएं ही हैं। अब तो जिस्म के अधिक से अधिक हिस्से में मेहंदी भी किसी और से लगवानी पड़ती है, इंतजार तक करना पड़ता है। तब मेहंदी फबती थी, रचती थी। आज मेहंदी लिपती-पुतती है और अगले दिन धुल-पुंछकर, रासायनिक असर छोड़कर साफ भी हो जाती है।
मैं इस पर्व के साथ जुड़ी भावना का पूरा सम्मान करता हूं। ये भी दूसरे तीज-त्योहारों की तरह श्रेष्ठ और पवित्र है। पर, बाजार की बाजीगरी और संचार माध्यमों की जादूगरी ने इसे जमीन से उठाकर हवा में उड़ना सिखा दिया है। मन के भावों को जिस्म और अभिनय में बदल दिया है। अब तो कुछ पति भी व्रत रखने लगे हैं? प्रदर्शन और प्रचार भी करते हैं। इससे उन्हें क्षणिक सुख भले मिलता हो, जिंदगीभर की खुशी शायद ही मिलती हो।
पहले ये पर्व अनकहे, बिना जताए-दिखाए, अगले करवाचौथ तक अपने पति के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक था। पति खुश और पत्नी भी। शायद इसलिए कि पुरुष का अहंकार तुष्ट और स्त्री की आश्वस्ति। आज के जीवन में जो दिखता है, उसे बिकाऊ-कमाऊ बनाने में बाजार की पूरी शक्ति, बुद्धि लगी हुई है। अफसोसनाक आश्चर्य होता है कि पर्व करवाचौथ है और मिट्टी के करवे गायब हैं। ये चांदी-सोने में तब्दील होते जा रहे हैं। दावतें पार्टियां हो रही हैं। अलंकरण और विदेशी गानों पर नाच हो रहा है। हमें डर है कि कहीं दूसरे पर्वो की तरह करवाचौथ भी गरीबों से दूर न हो जाए? ..हम नए चलन का स्वागत करते हैं, लेकिन करवाचौथ को तमाशा बनाने वालों से गलबहियां करना भी अपने बस की बात नहीं..!
जय बाबा बनारस 

Thursday, November 1, 2012

सुबह अच्छी

1.जिसकी सुबह अच्छी उसका दिन अच्छा .

2.जिसकी शाम अच्छी उसकी रात अच्छी .

3. जिसके दोस्त अच्छे उसकी पूरी की पूरी  जिंदगी अच्छी।।।।

जय बाबा बनारस।।।।