Saturday, February 14, 2015

दोस्ती

 बचपन के निस्वार्थ दोस्त आजकल कहा मिलते है आज तो दोस्त बस अपने अपने स्वार्थ को पूरा करने तक ही रहते है अब कहा है ऐसे दोस्त की दोस्त के माथे पर आये हुए पसीने को देख कर पूरी दुनिया का खून बहाने को तैयार रहते थे और अपनी जान देकर अपनी दोस्ती की मिसाल कायम रखते थे ...अबे बता तो क्या हुआ है ...आग लगा देंगे ...बोल तो सही ...भाई अब नहीं लिखा जा रहा है सोच सोच कर किस किस ने कहा कहा क्या क्या कुर्बान किया था भाई जी बचपन की दोस्ती बहुत सच्चे दोस्त होते थे ...अपने हर सच्चे दोस्त को दिल से राम राम ...

Tuesday, January 6, 2015

जन्नत की हूरे

रात सपने में पता नहीं कब में को मर गया और जन्नत पहुचने के बाद पता लगा की मेरा धर्मपरिवर्तन ,मरने से 2 मिनट पहले हुआ था और मैं सीधा जन्नत में "वाइल्ड Entry कार्ड" के जरिये आ गया हु। मन ही मन बड़ा खुस था चलो यार अब 72 मिलेंगी।
जो मेरे साथ जन्नत का सिपाही चल रहा था मैंने उस से पूछ ही लिया ,भाईजान अभी तक "72 हूर" नहीं दिखाई दी। वो अपने मुह से गुटके की पीक को थूकता हुआ बोला। अबे ! एक रात तो आराम करले ,थोड़ा सब्र करले -कल सुबह आऊंगा और तुझे हुरों के पास लेकर चलूँगा। और मुझे वो सफेद चांदनी में नहाये हुए रेगिस्तान में जो वास्तव में बहुत ही सुन्दर लग रहा था छोड़कर जाने लगा। मैंने उसका हाथ पकड़ा और बोला भाईजान ,यहाँ तो कोई नहीं है मुझे अकेला यहाँ क्यू छोड़कर जा रहे रहे हो। वो बोला- चिंता मत केवल रात की बात है ,तू भी कल से वही होगा ,जहा पर सब बाकी के "चरित्रवान शांतिप्रिय जन्नती" हैं
मैं थोड़ा सा सकपकाया फिर सोचा की यार जन्नत का मामला है अलग तो होगा ही, एक रात की बात है फिर तो 72 हुरे मिल ही जाएंगी। रेत पर लेट गया -आरामदायक रेत था -चांदनी फैली हुई थी -अच्छा शांत वातावरण था -ना कोई गीदड़ रो रहा था और ना ही कोई कुत्ता भोंक रहा था परन्तु नींद नहीं आई दिल तो 72 के फेर में था।
अगले दिन वो सिपाही थोड़ा लेट आया -पूछने पर बोला आज कुछ 14 -15 साल के नाबालिक शांति दूत आये हैं वो कह रहे थे कि हूरों पर पहला हक़ उनका है 
उन सब को कोड़े लगाये जा रहे हैं -हूरो की रानी के आदेश पर और बोला चल बई चल। (एक ख़ास बात बता दू धरती पर तो बिस्तर से उठने के लिए ,एक कप चाय चाहिए यहाँ पर उसकी जरूरत नहीं पड़ी।) 
अब उसने चुटकी बजाई और एक अजीब सा वेहिकल प्रकट हो गया ,कुछ अपने यहाँ के जुगाड़ू टैम्पू की तरह था और सीट नहीं थी उसमे। बिस्तर था जैसे किसी एम्बुलेंस की गाडी में होता है और पता ही नहीं चला कैसे अपन उस पर लेट गए और उसने आँख बंद करने को कहा -कुछ क्षणों के बाद उसने कहा -अबे जन्नती !,उत्तर मंजिल आ गई है।
और उसने मुझे एक कई किलोमीटर लम्बी लाइन में लगा दिया। और बोला यही खड़ा रहा तेरा भी नम्बर आ ही जाएगा -इस ही लाइन में खड़ा रहियो ,तो उम्मीद है की नम्बर आ ही जाएगा -मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला भाईजान ये क्या बदतमीज़ी है ? ये तो धोखा धडी है.मुझे तो पता चला था की जानत में 72 हूर मिलती है. वो हंसा -बोला गुटका है तेरे पास -मैंने कहा नहीं ,सिगरेट है -पियेगा 
वो बोला -पहले दे -वैसे बीड़ी भी चलती है -तेरे आगे वाले ने बीड़ी ही पिलाई थी,कई साल पहले। 
उसने सिगरेट ली। मुह में लगाईं और सिगरेट खुद ही जलने लगी और धुंवा अंदर ही सटकता हुआ बोला 
हम्म ! बोल तूने क्या सुना था।
मैंने कहा की जन्नत में "चरितवान् शांति प्रिय" लोगो को 72 हूरें मिलती हैं .उसने कहा की बिलकुल सही सुना और ऐसा ही हैं 'जिस लाइन में तू खड़ा है ,यहा से हज़ार कौस की दुरी पर 72 हूरों के 72 कोठे हैं। एक ही लाइन में बने हुए हैं और सबके आगे इतनी ही बड़ी लाइन लगी है अब देख कितने देर बाद तेरा नम्बर आएगा।' मैं बोला यार ,पता तो ये चला था की हर आदमी को अलग -अलग 72 मिलेंगी। 
तो वो बोला -हाँ अलग अलग ही हैं - 72 हूरें हैं और उनके 72 कोठे हैं -बिलकुल GB रोड की तरह।
मैं बोला - क्या GB रोड ?
वो सिगरेट का लंबा कस मारता हुआ बोला -अबे भादू मैं दिल्ली की बात कर रहा हु -यहाँ आने से पहले वही पर था मैं -समझा ! और सुन एक बात और चुपचाप खड़ा रहियो लाइन में -कुछ लफड़ा किया तो -एक कौस पीछे ले जाकर खड़ा कर देंगे और तेरे से पहले उनका नम्बर आएगा जो तेरे से बाद में आएंगे और उनको तेरे से आगे खड़ा कर देंगे ,
वैसे यार नम्बर तो आएगा ना - मैंने उस से मरी हुई आवाज़ में पूछा। वो बोला अबे ये "हुरे " हैं कोई औरत नहीं है की कोई भी जबरदस्ती कर ले। इनका जब मन होता है लाइन में एक -एक को बुलाती है -मन नहीं है तो कई कई दिन या सालों तक :इन्तजार : कराती हैं, किसी को नहीं बुलाती हैं। यहाँ हूरों की हुक्मरानी है आदमी की नहीं ........फिर भी यार -बता ना नम्बर तो आएगा ना !
वो बोला सुन, उम्मीद पर दुनिया कायम है तू भी तो उम्मीद करके ही धर्मपरिवर्तन करके आया है ,वो ही उम्मीद कायम रख। 100 से 200 साल में नम्बर आ ही जाएगा -आराम से खड़ा रह। खाने पीने की तो कोई चिंता है नहीं, यहाँ पर जितने भी जन्नती - सबकी एक ही चिंता है की -उनको '72 हूर ' कब मिलेंगी 
और कुछ काम है ही नहीं यहाँ करने के लिए ,बस चुपचाप लाइन में खड़ा रहना है , एक ही तो काम है ये , फिर क्या दिक्कत है।
मेरी समझ में ये भी आ गया था की रात को क्यों मैं रेगिस्तान में अकेला था -मेरे सारे जन्नती भाई तो यहाँ लाइन में खड़े थे।
तबी देखा की एक आदमी को 2 जन्नती सिपाही घसीटते हुए मेरे से भी पीछे की और ले जा रहे थे -मैंने अपने साथ के सिपाही की तरफ देखा -उसने अपना मुह खोला -दांतों पर मोबाइल की तरह नम्बर टाइप और कोई ना समझ में आने वाली भाषा में बात करके बोला -ये आदमी 132 साल से लाइन में लगा था आज इस से पहले वाले का नम्बर था -इसके बाद हूरें कुछ दिन के लिए छुटटी पर थी, तो इसको ये सहन नहीं हुआ और इसने अपने से अगले वाले को ध्क्का दे दिया और खुद खड़ा हो गया और जब हूरों के सिपाहियों ने पूछा की ऐसा क्यों किया -तो लगा "सेकुलरी" छाड्ने -बोला -'मैंने तो कोई धक्का दिया ही नहीं है -कोई सबूत हो तो बताओ ? और जोर जोर से चिल्लाने लगा।
इसको ये सिपाही तुमसे एक कोस नहीं -5 कोस पीछे ले जाकर खड़ा करेंगे -ऐसा हुक्म दिया है -उस हूर ने जिसकी ये लाइन में था। और फिर उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोला -देख भाई कोई पंगा मत लियो -तुझे बता रहा हु तेरा नम्बर 2178  वर्ष में आ जाएगा। -
जय बाबा बनारस ...

Friday, January 2, 2015

आदमखोर शेर ...

सभी मित्र ध्यान से पढ़े।
एक बार औरंगजेब के दरबार में एक शिकारी जंगल से पकड़कर एक बड़ा भारी शेर लाया ! लोहे के पिंजरे में बंद शेर बार-बार दहाड़ रहा था ! बादशाह कहता था... इससे बड़ा भयानक शेर दूसरा नहीं मिल सकता !
दरबारियों ने हाँ में हाँ मिलायी.. किन्तु वहाँ मौजूद राजा यसवंत सिंह जी ने कहा - इससे भी अधिक शक्तिशाली शेर मेरे पास है ! क्रूर एवं अधर्मी औरंगजेब को बड़ा क्रोध हुआ ! उसने कहा तुम अपने शेर को इससे लड़ने को छोडो.. यदि तुम्हारा शेर हार गया तो तुम्हारा सर काट लिया जायेगा ...... !
दुसरे दिन किले के मैदान में दो शेरों का मुकाबला देखने बहुत बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गयी ! औरंगजेब बादशाह भी ठीक समय पर आकर अपने सिंहासन पर बैठ गया ! राजा यशवंत सिंह अपने दस वर्ष के पुत्र पृथ्वी सिंह के साथ आये ! उन्हें देखकर बादशाह ने पूछा-- आपका शेर कहाँ है ?
यशवंत सिंह बोले- मैं अपना शेर अपने साथ लाया हूँ ! आप केवल लडाई की आज्ञा दीजिये ! बादशाह की आज्ञा से जंगली शेर को लोहे के बड़े पिंजड़े में छोड़ दिया गया !
यशवंत सिंह ने अपने पुत्र को उस पिंजड़े में घुस जाने को कहा ! बादशाह एवं वहां के लोग हक्के- बक्के रह गए ! किन्तु दस वर्ष का निर्भीक बालक पृथ्वी सिंह पिता को प्रणाम करके हँसते-हँसते शेर के पिंजड़े में घुस गया !
शेर ने पृथ्वी सिंह की ओर देखा ! उस तेजस्वी बालक के नेत्रों में देखते ही एकबार तो वह पूंछ दबाकर पीछे हट गया.. लेकिन मुस्लिम सैनिकों द्वारा भाले की नोक से उकसाए जाने पर शेर क्रोध में दहाड़ मारकर पृथ्वी सिंह पर टूट पड़ा ! वार बचा कर वीर बालक एक ओर हटा और अपनी तलवार खींच ली !
पुत्र को तलवार निकालते हुए देखकर यशवंत सिंह ने पुकारा - बेटा, तू यह क्या करता है ? शेर के पास तलवार है क्या जो तू उसपर तलवार चलाएगा ? यह हमारे हिन्दू-धर्म की शिक्षाओं के विपरीत है और धर्मयुद्ध नहीं है ! पिता की बात सुनकर पृथ्वी सिंह ने तलवार फेंक दी और निहत्था ही शेर पर टूट पड़ा !
अंतहीन से दिखने वाले एक लम्बे संघर्ष के बाद आख़िरकार उस छोटे से बालक ने शेर का जबड़ा पकड़कर फाड़ दिया और फिर पूरे शरीर को चीर दो टुकड़े कर फेंक दिया ! भीड़ उस वीर बालक पृथ्वी सिंह की जय-जयकार करने लगी !
अपने.. और शेर के खून से लथपथ पृथ्वी सिंह जब पिंजड़े से बाहर निकला तो पिता ने दौड़कर अपने पुत्र को छाती से लगा लिया !
तो ऐसे थे हमारे पूर्वजों के कारनामे.. जिनके मुख-मंडल वीरता के ओज़ से ओतप्रोत रहते थे !
और आज हम क्या बना रहे हैं अपनी संतति को.. सारेगामा लिट्ल चैंप्स के नचनिये.. ?
आज समय फिर से मुड़ कर इतिहास के उसी औरंगजेबी काल की ओर ताक रहा है.. हमें चेतावनी देता हुआ सा..
कि जरूरत है कि हिन्दू अपने बच्चों को फिर से वही हिन्दू संस्कार दें.. ताकि बक्त पड़ने पर वो शेर से भी भिड़ जाये.. न कि “सुवरों” की तरह चिड़ियाघर के पालतू शेर के आगे भी हाथ पैर जोड़ें.. ! जय श्री राम !!
जय बाबा बनारस ...

Wednesday, October 15, 2014

कॉफ़ी -शॉप...दो कप कॉफ़ी

जापान के टोक्यो शहर के निकट एक कस्बा अपनी खुशहाली के लिए प्रसिद्द था एक बार एक व्यक्ति उस कसबे की खुशहाली का कारण जानने के लिए सुबह -सुबह वहाँ पहुंचा . कस्बे में घुसते ही उसे एक कॉफ़ी -शॉप दिखायी दी। उसने मन ही मन सोचा कि मैं यहाँ बैठ कर चुप -चाप लोगों को देखता हूँ , और वह धीरे -धीरे आगे बढ़ते हुए शॉप के अंदर लगी एक कुर्सी पर जा कर बैठ गया .कॉफ़ी-शॉप शहर के रेस्टोरेंटस की तरह ही थी , पर वहाँ उसे लोगों का व्यवहार कुछ अजीब लगा .एक आदमी शॉप में आया और उसने दो कॉफ़ी के पैसे देते हुए कहा , “ दो कप कॉफ़ी , एक मेरे लिए और एक उस दीवार पर। ”
व्यक्ति दीवार की तरफ देखने लगा लेकिन उसे वहाँ कोई नज़र नहीं आया , पर फिर भी उस आदमी को कॉफ़ी देने के बाद वेटर दीवार के पास गया और उस पर कागज़ का एक टुकड़ा चिपका दिया , जिसपर “एक कप कॉफ़ी ” लिखा था .व्यक्ति समझ नहीं पाया कि आखिर माजरा क्या है . उसने सोचा कि कुछ देर और बैठता हूँ , और समझने की कोशिश करता हूँ .
थोड़ी देर बाद एक गरीब मजदूर वहाँ आया , उसके कपड़े फटे -पुराने थे पर फिर भी वह पुरे आत्म -विश्वास के साथ शॉप में घुसा और आराम से एक कुर्सी पर बैठ गया .व्यक्ति सोच रहा था कि एक मजदूर के लिए कॉफ़ी पर इतने पैसे बर्वाद करना कोई समझदारी नहीं है …तभी वेटर मजदूर के पास आर्डर लेने पंहुचा .
“ सर , आपका आर्डर प्लीज !”, वेटर बोला .
“ दीवार से एक कप कॉफ़ी .” , मजदूर ने जवाब दिया .
वेटर ने मजदूर से बिना पैसे लिए एक कप कॉफ़ी दी और दीवार पर लगी ढेर सारे कागज के टुकड़ों में से “एक कप कॉफ़ी ” लिखा एक टुकड़ा निकाल कर डस्टबिन में फेंक दिया .व्यक्ति को अब सारी बात समझ आ गयी थी . कसबे के लोगों का ज़रूरतमंदों के प्रति यह रवैया देखकर वह भाव-विभोर हो गया … उसे लगा , सचमुच लोगों ने मदद का कितना अच्छा तरीका निकाला है जहां एक गरीब मजदूर भी बिना अपना आत्मसम्मान कम किये एक अच्छी सी कॉफ़ी -शॉप में खाने -पीने का आनंद ले सकता है .


जय बाबा बनारस...

ख़ुशी का पुल ...

दो भाई साथ साथ खेती करते थे। मशीनों की भागीदारी और चीजों का व्यवसाय किया करते थे। चालीस साल के साथ के बाद एक छोटी सी ग़लतफहमी की वजह से उनमें पहली बार झगडा हो गया था झगडा दुश्मनी में बदल गया था।
एक सुबह एक बढई बड़े भाई से काम मांगने आया. बड़े भाई ने कहा “हाँ ,मेरे पास तुम्हारे लिए काम हैं। उस तरफ देखो, वो मेरा पडोसी है, यूँ तो वो मेरा भाई है, पिछले हफ्ते तक हमारे खेतों के बीच घास का मैदान हुआ करता था पर मेरा भाई बुलडोजर ले आया और अब हमारे खेतों के बीच ये खाई खोद दी, जरुर उसने मुझे परेशान करने के लिए ये सब किया है अब मुझे उसे मजा चखाना है, तुम खेत के चारों तरफ बाड़ बना दो ताकि मुझे उसकी शक्ल भी ना देखनी पड़े."
“ठीक हैं”, बढई ने कहा।
बड़े भाई ने बढई को सारा सामान लाकर दे दिया और खुद शहर चला गया, शाम को लौटा तो बढई का काम देखकर भौंचक्का रह गया, बाड़ की जगह वहा एक पुल था जो खाई को एक तरफ से दूसरी तरफ जोड़ता था. इससे पहले की बढई कुछ कहता, उसका छोटा भाई आ गया।
छोटा भाई बोला “तुम कितने दरियादिल हो , मेरे इतने भला बुरा कहने के बाद भी तुमने हमारे बीच ये पुल बनाया, कहते कहते उसकी आँखे भर आईं और दोनों एक दूसरे के गले लग कर रोने लगे. जब दोनों भाई सम्भले तो देखा कि बढई जा रहा है।
रुको! मेरे पास तुम्हारे लिए और भी कई काम हैं, बड़ा भाई बोला।
मुझे रुकना अच्छा लगता ,पर मुझे ऐसे कई पुल और बनाने हैं, बढई मुस्कुराकर बोला और अपनी राह को चल दिया.
दिल से मुस्कुराने के लिए जीवन में पुल की जरुरत होती हैं खाई की नहीं। छोटी छोटी बातों पर अपनों से न रूठें।
"दीपावली आ रही है घरेलू रिश्तों के साथ साथ सभी दोस्ती के रिश्तों पर जमी धूल भी साफ कर लेना, खुशियाँ चार गुनी हो जाएंगी"
आने वाली दीपावली आप सभी के लिए खुशियाँ ले कर आए...आहा..!!

जय बाबा बनारस ....

Saturday, September 27, 2014

भिन्डी

एक राजा था उसके महल में एक नया खानसामा ( खाना बनाने वाला ) आया जो बहुत ही चतुर व्यक्ति था और भोजन बहुत लज़ीज़ बनाता था ! उस खानसामे को पता था की राजा की पसंदीदा सब्ज़ी भिन्डी है ! उसने इसीलिए रात के भोजन में भिन्डी बनाई ! जब राजा ने देखा की भिन्डी बनाई गयी है राजा खुश हो गया और चूँकि भिन्डी स्वादिष्ट थी तो भिन्डी खा कर तो और भी गदगद हो गया ! राजा ने खानसामे से खुश होते हुए कहा की : मज़ा आ गया आज तो भिन्डी खा कर भिन्डी क्या ज़बरदस्त सब्ज़ी होती है वाह ! इस पर खानसामा बोला अरे साहब भिन्डी का तो कोई जवाब ही नहीं मैं तो कहता हूँ की सब्ज़ियों की रानी है भिन्डी, भिन्डी जैसी कोई सब्ज़ी नहीं ! राजा और भी खुश हुआ और अपने गले से हीरे की माला निकाल कर उस खानसामे को दी और कहा ये लो तुम्हारा इनाम ! अगले दिन दोपहर का भोजन करने जैसे ही राजा बैठा उसने देखा की खानसामे ने फिर भिन्डी बना दी लेकिन अब राजा ने भिन्डी की इतनी तारीफ कर दी थी उसे मना करते नहीं बना और उसे फिर भिन्डी की तारीफ करना पड़ी और खाना पड़ी और खानसामे ने भी भिन्डी की तारीफ की और राजा ने फिर अपने गले से माला निकाल कर खानसामे को दे दी ! अब बारी थी रात के भोजन की रात के भोजन में फिरसे खानसामे ने भिन्डी बना दी राजा लगातार 2 दिनो से भिन्डी खाके उक्ता चुका था उसने लेकिन उसने जैसे तैसे मन मार के भिन्डी खा ली और चुपचाप एक माला गले से निकाल कर खानसामे को दे दी ! अब अगले दिन जब फिर भोजन करने बैठा राजा उसे फिर भिन्डी नज़र आ गयी ! राजा आग बबूला हो गया भिन्डी देख कर और बोला क्या वाहियात सब्ज़ी होती है भिन्डी क्यों बना दी किसने कहा तुम्हे भिन्डी बनाने को !! खानसामा विनम्रतापूर्वक बोला की साहब भिन्डी तो निहायती घटिया सब्ज़ी होती है मैं तो कहता हूँ की किसी बेवक़ूफ़ को ही पसंद होगी भिन्डी, पता नहीं कैसे खा लेते है लोग भिन्डी !! राजा का ये सुनते ही और भी दिमाग खराब हो गया और वो चिल्लाता हुआ बोला अरे नामाकूल कल तक जब तक मैं भिन्डी की तारीफ कर रहा था तू भी भिन्डी की तारीफ कर रहा था और अब जब मैं भिन्डी की बुराई करने लगा तो तू भी भिन्डी की बुराई करने लगा बड़ा होशियार है तू !! इस पर खानसामा मुस्कुराता हुआ बोला : साहब मैं आपका नौकर हूँ भिन्डी का नहीं !!


जय बाबा बनारस .....

भिन्डी

एक राजा था उसके महल में एक नया खानसामा ( खाना बनाने वाला ) आया जो बहुत ही चतुर व्यक्ति था और भोजन बहुत लज़ीज़ बनाता था ! उस खानसामे को पता था की राजा की पसंदीदा सब्ज़ी भिन्डी है ! उसने इसीलिए रात के भोजन में भिन्डी बनाई ! जब राजा ने देखा की भिन्डी बनाई गयी है राजा खुश हो गया और चूँकि भिन्डी स्वादिष्ट थी तो भिन्डी खा कर तो और भी गदगद हो गया ! राजा ने खानसामे से खुश होते हुए कहा की : मज़ा आ गया आज तो भिन्डी खा कर भिन्डी क्या ज़बरदस्त सब्ज़ी होती है वाह ! इस पर खानसामा बोला अरे साहब भिन्डी का तो कोई जवाब ही नहीं मैं तो कहता हूँ की सब्ज़ियों की रानी है भिन्डी, भिन्डी जैसी कोई सब्ज़ी नहीं ! राजा और भी खुश हुआ और अपने गले से हीरे की माला निकाल कर उस खानसामे को दी और कहा ये लो तुम्हारा इनाम ! अगले दिन दोपहर का भोजन करने जैसे ही राजा बैठा उसने देखा की खानसामे ने फिर भिन्डी बना दी लेकिन अब राजा ने भिन्डी की इतनी तारीफ कर दी थी उसे मना करते नहीं बना और उसे फिर भिन्डी की तारीफ करना पड़ी और खाना पड़ी और खानसामे ने भी भिन्डी की तारीफ की और राजा ने फिर अपने गले से माला निकाल कर खानसामे को दे दी ! अब बारी थी रात के भोजन की रात के भोजन में फिरसे खानसामे ने भिन्डी बना दी राजा लगातार 2 दिनो से भिन्डी खाके उक्ता चुका था उसने लेकिन उसने जैसे तैसे मन मार के भिन्डी खा ली और चुपचाप एक माला गले से निकाल कर खानसामे को दे दी ! अब अगले दिन जब फिर भोजन करने बैठा राजा उसे फिर भिन्डी नज़र आ गयी ! राजा आग बबूला हो गया भिन्डी देख कर और बोला क्या वाहियात सब्ज़ी होती है भिन्डी क्यों बना दी किसने कहा तुम्हे भिन्डी बनाने को !! खानसामा विनम्रतापूर्वक बोला की साहब भिन्डी तो निहायती घटिया सब्ज़ी होती है मैं तो कहता हूँ की किसी बेवक़ूफ़ को ही पसंद होगी भिन्डी, पता नहीं कैसे खा लेते है लोग भिन्डी !! राजा का ये सुनते ही और भी दिमाग खराब हो गया और वो चिल्लाता हुआ बोला अरे नामाकूल कल तक जब तक मैं भिन्डी की तारीफ कर रहा था तू भी भिन्डी की तारीफ कर रहा था और अब जब मैं भिन्डी की बुराई करने लगा तो तू भी भिन्डी की बुराई करने लगा बड़ा होशियार है तू !! इस पर खानसामा मुस्कुराता हुआ बोला : साहब मैं आपका नौकर हूँ भिन्डी का नहीं !!


जय बाबा बनारस .....

भिन्डी

एक राजा था उसके महल में एक नया खानसामा ( खाना बनाने वाला ) आया जो बहुत ही चतुर व्यक्ति था और भोजन बहुत लज़ीज़ बनाता था ! उस खानसामे को पता था की राजा की पसंदीदा सब्ज़ी भिन्डी है ! उसने इसीलिए रात के भोजन में भिन्डी बनाई ! जब राजा ने देखा की भिन्डी बनाई गयी है राजा खुश हो गया और चूँकि भिन्डी स्वादिष्ट थी तो भिन्डी खा कर तो और भी गदगद हो गया ! राजा ने खानसामे से खुश होते हुए कहा की : मज़ा आ गया आज तो भिन्डी खा कर भिन्डी क्या ज़बरदस्त सब्ज़ी होती है वाह ! इस पर खानसामा बोला अरे साहब भिन्डी का तो कोई जवाब ही नहीं मैं तो कहता हूँ की सब्ज़ियों की रानी है भिन्डी, भिन्डी जैसी कोई सब्ज़ी नहीं ! राजा और भी खुश हुआ और अपने गले से हीरे की माला निकाल कर उस खानसामे को दी और कहा ये लो तुम्हारा इनाम ! अगले दिन दोपहर का भोजन करने जैसे ही राजा बैठा उसने देखा की खानसामे ने फिर भिन्डी बना दी लेकिन अब राजा ने भिन्डी की इतनी तारीफ कर दी थी उसे मना करते नहीं बना और उसे फिर भिन्डी की तारीफ करना पड़ी और खाना पड़ी और खानसामे ने भी भिन्डी की तारीफ की और राजा ने फिर अपने गले से माला निकाल कर खानसामे को दे दी ! अब बारी थी रात के भोजन की रात के भोजन में फिरसे खानसामे ने भिन्डी बना दी राजा लगातार 2 दिनो से भिन्डी खाके उक्ता चुका था उसने लेकिन उसने जैसे तैसे मन मार के भिन्डी खा ली और चुपचाप एक माला गले से निकाल कर खानसामे को दे दी ! अब अगले दिन जब फिर भोजन करने बैठा राजा उसे फिर भिन्डी नज़र आ गयी ! राजा आग बबूला हो गया भिन्डी देख कर और बोला क्या वाहियात सब्ज़ी होती है भिन्डी क्यों बना दी किसने कहा तुम्हे भिन्डी बनाने को !! खानसामा विनम्रतापूर्वक बोला की साहब भिन्डी तो निहायती घटिया सब्ज़ी होती है मैं तो कहता हूँ की किसी बेवक़ूफ़ को ही पसंद होगी भिन्डी, पता नहीं कैसे खा लेते है लोग भिन्डी !! राजा का ये सुनते ही और भी दिमाग खराब हो गया और वो चिल्लाता हुआ बोला अरे नामाकूल कल तक जब तक मैं भिन्डी की तारीफ कर रहा था तू भी भिन्डी की तारीफ कर रहा था और अब जब मैं भिन्डी की बुराई करने लगा तो तू भी भिन्डी की बुराई करने लगा बड़ा होशियार है तू !! इस पर खानसामा मुस्कुराता हुआ बोला : साहब मैं आपका नौकर हूँ भिन्डी का नहीं !!


जय बाबा बनारस .....

भिन्डी

एक राजा था उसके महल में एक नया खानसामा ( खाना बनाने वाला ) आया जो बहुत ही चतुर व्यक्ति था और भोजन बहुत लज़ीज़ बनाता था ! उस खानसामे को पता था की राजा की पसंदीदा सब्ज़ी भिन्डी है ! उसने इसीलिए रात के भोजन में भिन्डी बनाई ! जब राजा ने देखा की भिन्डी बनाई गयी है राजा खुश हो गया और चूँकि भिन्डी स्वादिष्ट थी तो भिन्डी खा कर तो और भी गदगद हो गया ! राजा ने खानसामे से खुश होते हुए कहा की : मज़ा आ गया आज तो भिन्डी खा कर भिन्डी क्या ज़बरदस्त सब्ज़ी होती है वाह ! इस पर खानसामा बोला अरे साहब भिन्डी का तो कोई जवाब ही नहीं मैं तो कहता हूँ की सब्ज़ियों की रानी है भिन्डी, भिन्डी जैसी कोई सब्ज़ी नहीं ! राजा और भी खुश हुआ और अपने गले से हीरे की माला निकाल कर उस खानसामे को दी और कहा ये लो तुम्हारा इनाम ! अगले दिन दोपहर का भोजन करने जैसे ही राजा बैठा उसने देखा की खानसामे ने फिर भिन्डी बना दी लेकिन अब राजा ने भिन्डी की इतनी तारीफ कर दी थी उसे मना करते नहीं बना और उसे फिर भिन्डी की तारीफ करना पड़ी और खाना पड़ी और खानसामे ने भी भिन्डी की तारीफ की और राजा ने फिर अपने गले से माला निकाल कर खानसामे को दे दी ! अब बारी थी रात के भोजन की रात के भोजन में फिरसे खानसामे ने भिन्डी बना दी राजा लगातार 2 दिनो से भिन्डी खाके उक्ता चुका था उसने लेकिन उसने जैसे तैसे मन मार के भिन्डी खा ली और चुपचाप एक माला गले से निकाल कर खानसामे को दे दी ! अब अगले दिन जब फिर भोजन करने बैठा राजा उसे फिर भिन्डी नज़र आ गयी ! राजा आग बबूला हो गया भिन्डी देख कर और बोला क्या वाहियात सब्ज़ी होती है भिन्डी क्यों बना दी किसने कहा तुम्हे भिन्डी बनाने को !! खानसामा विनम्रतापूर्वक बोला की साहब भिन्डी तो निहायती घटिया सब्ज़ी होती है मैं तो कहता हूँ की किसी बेवक़ूफ़ को ही पसंद होगी भिन्डी, पता नहीं कैसे खा लेते है लोग भिन्डी !! राजा का ये सुनते ही और भी दिमाग खराब हो गया और वो चिल्लाता हुआ बोला अरे नामाकूल कल तक जब तक मैं भिन्डी की तारीफ कर रहा था तू भी भिन्डी की तारीफ कर रहा था और अब जब मैं भिन्डी की बुराई करने लगा तो तू भी भिन्डी की बुराई करने लगा बड़ा होशियार है तू !! इस पर खानसामा मुस्कुराता हुआ बोला : साहब मैं आपका नौकर हूँ भिन्डी का नहीं !!


जय बाबा बनारस .....

भिन्डी

एक राजा था उसके महल में एक नया खानसामा ( खाना बनाने वाला ) आया जो बहुत ही चतुर व्यक्ति था और भोजन बहुत लज़ीज़ बनाता था ! उस खानसामे को पता था की राजा की पसंदीदा सब्ज़ी भिन्डी है ! उसने इसीलिए रात के भोजन में भिन्डी बनाई ! जब राजा ने देखा की भिन्डी बनाई गयी है राजा खुश हो गया और चूँकि भिन्डी स्वादिष्ट थी तो भिन्डी खा कर तो और भी गदगद हो गया ! राजा ने खानसामे से खुश होते हुए कहा की : मज़ा आ गया आज तो भिन्डी खा कर भिन्डी क्या ज़बरदस्त सब्ज़ी होती है वाह ! इस पर खानसामा बोला अरे साहब भिन्डी का तो कोई जवाब ही नहीं मैं तो कहता हूँ की सब्ज़ियों की रानी है भिन्डी, भिन्डी जैसी कोई सब्ज़ी नहीं ! राजा और भी खुश हुआ और अपने गले से हीरे की माला निकाल कर उस खानसामे को दी और कहा ये लो तुम्हारा इनाम ! अगले दिन दोपहर का भोजन करने जैसे ही राजा बैठा उसने देखा की खानसामे ने फिर भिन्डी बना दी लेकिन अब राजा ने भिन्डी की इतनी तारीफ कर दी थी उसे मना करते नहीं बना और उसे फिर भिन्डी की तारीफ करना पड़ी और खाना पड़ी और खानसामे ने भी भिन्डी की तारीफ की और राजा ने फिर अपने गले से माला निकाल कर खानसामे को दे दी ! अब बारी थी रात के भोजन की रात के भोजन में फिरसे खानसामे ने भिन्डी बना दी राजा लगातार 2 दिनो से भिन्डी खाके उक्ता चुका था उसने लेकिन उसने जैसे तैसे मन मार के भिन्डी खा ली और चुपचाप एक माला गले से निकाल कर खानसामे को दे दी ! अब अगले दिन जब फिर भोजन करने बैठा राजा उसे फिर भिन्डी नज़र आ गयी ! राजा आग बबूला हो गया भिन्डी देख कर और बोला क्या वाहियात सब्ज़ी होती है भिन्डी क्यों बना दी किसने कहा तुम्हे भिन्डी बनाने को !! खानसामा विनम्रतापूर्वक बोला की साहब भिन्डी तो निहायती घटिया सब्ज़ी होती है मैं तो कहता हूँ की किसी बेवक़ूफ़ को ही पसंद होगी भिन्डी, पता नहीं कैसे खा लेते है लोग भिन्डी !! राजा का ये सुनते ही और भी दिमाग खराब हो गया और वो चिल्लाता हुआ बोला अरे नामाकूल कल तक जब तक मैं भिन्डी की तारीफ कर रहा था तू भी भिन्डी की तारीफ कर रहा था और अब जब मैं भिन्डी की बुराई करने लगा तो तू भी भिन्डी की बुराई करने लगा बड़ा होशियार है तू !! इस पर खानसामा मुस्कुराता हुआ बोला : साहब मैं आपका नौकर हूँ भिन्डी का नहीं !!


जय बाबा बनारस .....

Saturday, September 20, 2014

एक कहानी झुण्ड....

विवेकानंद ने एक कहानी का जिक्र कई बार किया है | 
एक शेर का बच्चा अपने झुण्ड से बिछुड जाता है और भेंड़ों के झुण्ड में जा मिलता है | उसका लालन
पालन भेंड़ों की तरह होता है और उसमे भेंड के सारे गुण आ जातें हैं | एक दिन उस भेंड़ों के झुण्ड पर
एक शेर आक्रमण कर देता है सारे भेंड अपनी जान ले कर भागतें हैं | शेर का बच्चा भी भागता है |शेर
को यह सब देख कर मारे आश्चर्य की उसकी आँखें फटी रह जाती है | वह भेंड़ों को छोड़ कर पहले
शेर के बच्चे को पहले दबोचता है | शेर का बच्चा मिमियाने लगता है |शेर उस बच्चे से पूछता है की भेंड तो भाग गए कोई बात नहीं लेकिन तुम क्यों भाग रहे हो ?
शेर का बच्चा मिमियाने लगता है | शेर को बात समझ में आ जाती है ,पास हीं नदी बह रही होती है | शेर उस बच्चे का गर्दन पकड कर नदी में उसका छवि दिखाता है | शेर का बच्चा अपने को पहचान कर जोरदार गर्जन करता है | शेर को मारे खुशी के आंसू छलक आतें हैं |हम भटके हुए शेर के बच्चे हैं समय समय पर कोई कृष्ण अपने गीता के माध्यम से ये बताता है कि हम शेर हैं और खुद को भेंड समझ बैठे हैं और जब हम खुद को पहचानतें हैं तो जितनी खुशी हमें होती है
वर्तमान में भारत की जो दुर्दशा यहाँ के भ्रष्टों ने ,आततायिओं ने बना रखी है ऐसे में हमें अपने शेर होने का परिचय देना हीं होगा | हम शेर बन कर भ्रष्टों के गले दबोचे और एक एक चीज का हिसाब मांगे | हम शेर हैं और शेर की तरह जियें | हमारे नस नस में रक्त की ज्वाला बह रही है | हम ऊर्जा और शक्ति के श्रोत हैं | हम ईश्वरपुत्र हैं ऐसे भाव के साथ जियें |



Tuesday, August 19, 2014

शिखा का त्याग करना मानो अपने कल्याणका त्याग करना हैं।

हिन्दू धर्म का छोटे से छोटा सिध्दांत,छोटी-से-छोटी बात भी अपनी जगह पूर्ण और कल्याणकारी हैं। छोटी सी शिखा अर्थात् चोटी भी कल्याण,विकास का साधन बनकर अपनी पूर्णता व आवश्यकता को दर्शाती हैं। शिखा का त्याग करना मानो अपने कल्याणका त्याग करना हैं। जैसे घङी के छोटे पुर्जे की जगह बडा पुर्जा काम नहीं कर सकता क्योंकि भले वह छोटा हैं परन्तु उसकी अपनी महत्ता हैं, ऐसे ही शिखा की भी अपनी महत्ता हैं। शिखा न रखने से हम जिस लाभ से वंचित रह जाते हैं, उसकी पूर्ति अन्यकिसी साधन से नहीं हो सकती।
'हरिवंश पुराण' में एक कथा आती हैं। हैहय व तालजंघ वंश के राजाओं ने शक, यवन, काम्बोज पारद आदि राजाओं को साथ लेकर राजा बाहू का राज्य छीन लिया। राजा बाहु अपनी पत्नी के साथ वन में चला गया। वहाँ राजा की मृत्यु हो गयी। महर्षिऔर्व ने उसकी गर्भवती पत्नी की रक्षा की और उसे अपने आश्रम में ले आये। वहाँ उसने एक पुत्र को जन्म दिया, जो आगे चलकर राजा सगर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। राजा सगर ने महर्षि और्व से शस्त्र और शास्त्र विद्या सीखीं। समय पाकर राजा सगरने हैहयों को मार डाला और फिर शक, यवन, काम्बोज, पारद, आदि राजाओं को भी मारने का निश्चय किया। ये शक, यवन आदि राजा महर्षि वसिष्ठ की शरण में चले गये। महर्षि वसिष्ठ ने उन्हें कुछ शर्तों पर उन्हें अभयदान दे दिया। और सगर कोआज्ञा दी कि वे उनको न मारे। राजा सगर अपनी प्रतिज्ञा भी नहीं छोङ सकते थे और महर्षि वसिष्ठ जी की आज्ञा भी नहीं टाल सकते थे। अत: उन्होंने उन राजाओं का सिर शिखासहित मुँडवाकर उनकों छोङ दिया।
प्राचीन काल में किसीकी शिखा काट देना मृत्युदण्ड के समान माना जाता था। बङे दुख की बात हैं कि आज हिन्दु लोग अपने हाथों से अपनी शिखा काट रहे है। यह गुलामी की पहचान हैं। शिखा हिन्दुत्व की पहचान हैं। यह आपके धर्म और संस्कृतिकी रक्षक हैं। शिखा के विशेष महत्व के कारण ही हिन्दुओं ने यवन शासन के दौरान अपनी शिखा की रक्षा के लिए सिर कटवा दिये पर शिखा नहीं कटवायी।

डा॰ हाय्वमन कहते है -''मैने कई वर्ष भारत मे रहकर भारतीय संस्कृति क अध्ययन किया हैं ,यहाँ के निवासी बहुत काल से चोटी रखते हैं , जिसका वर्णन वेदों में भी मिलता हैं। दक्षिण में तो आधे सिर पर 'गोखुर' के समान चोटी रखते हैं ।उनकी बुध्दि की विलक्षणता देखकर मैं अत्यंत प्रभावित हुआ हुँ। अवश्य ही बौध्दिक विकास में चोटी बङी सहायता देती हैं । सिर पर चोटी रखना बढा लाभदायक हैं । मेरा तो हिन्दु धर्म में अगाध विश्वास हैं और मैं चोटी रखने का कायल हो गया हूँ । "
प्रसिद्ध वैज्ञानिक डा॰ आई॰ ई क्लार्क एम॰ डी ने कहा हैं " मैंने जबसे इस विज्ञान की खोज की हैं तब से मुझे विश्वास हो गया हैं कि हिन्दुओं का हर एक नियम विज्ञान से परिपूर्ण हैं। चोटी रखना हिन्दू धर्म ही नहीं , सुषुम्ना के केद्रों की रक्षा केलिये ऋषि-मुनियों की खोज का विलक्षण चमत्कार हैं।"
इसी प्रकार पाश्चात्य विद्वान मि॰ अर्ल थामस लिखते हैं की "सुषुम्ना की रक्षा हिन्दु लोग चोटी रखकर करते हैं जब्की अन्य देशों में लोग सिर पर लम्बे बाल रखकर या हैट पहनकर करते हैं। इन सब में चोटी रखना सबसे लाभकारी हैं। किसी भीप्रकार से सुषुम्ना की रक्षा करना जरुरी हैं।"
वास्तव में मानव-शरीर को प्रकृति ने इतना सबल बनाया हैं की वह बङे से बङे आघात को भी सहन करके रह जाता हैं परन्तु शरीर में कुछ ऐसे भी स्थान हैं जिन पर आघात होने से मनुष्य की तत्काल मृत्यु हो सकती हैं। इन्हें मर्म-स्थान कहाजाता हैं। शिखा के अधोभाग में भी मर्म-स्थान होता हैं, जिसके लिये सुश्रुताचार्य ने लिखा हैं
मस्तकाभ्यन्तरो परिष्टात् शिरा सन्धि सन्निपातों ।
रोमावर्तोऽधिपतिस्तत्रपि सधो मरण्म् ।
अर्थात् मस्तक के भीतर ऊपर जहाँ बालों का आवर्त(भँवर) होता हैं, वहाँ संपूर्ण नाङियों व संधियों का मेल हैं, उसे 'अधिपतिमर्म' कहा जाता हैं।यहाँ चोट लगने से तत्काल मृत्यु हो जाती हैं
(सुश्रुत संहिता शारीरस्थानम् : ६.२८)
सुषुम्ना के मूल स्थान को 'मस्तुलिंग' कहते हैं। मस्तिष्क के साथ ज्ञानेन्द्रियों - कान, नाक, जीभ, आँख आदि का संबंध हैं और कामेन्द्रियों - हाथ, पैर,गुदा,इन्द्रिय आदि का संबंध मस्तुलिंग से हैं मस्तिष्क व मस्तुलिंग जितने सामर्थ्यवान होते हैं उतनीही ज्ञानेन्द्रियों और कामेन्द्रियों - की शक्ति बढती हैं। मस्तिष्क ठंडक चाहता हैं और मस्तुलिंग गर्मी मस्तिष्क को ठंडक पहुँचाने के लिये क्षौर कर्म करवाना और मस्तुलिंग को गर्मी पहुँचाने के लिये गोखुर के परिमाण के बाल रखना आवश्यक होता हैं ।बाल कुचालक हैं, अत: चोटी के लम्बे बाल बाहर की अनावश्यक गर्मी या ठंडक से मस्तुलिंग की रक्षा करते हैं
शिखा रखने के अन्य निम्न लाभ बताये गये हैं -
१॰ शिखा रखने तथा इसके नियमों का यथावत् पालन करने से सद्‌बुद्धि , सद्‌विचारादि की प्राप्ति होती हैं।
२॰ आत्मशक्ति प्रबल बनती हैं।
३॰मनुष्य धार्मिक , सात्विक व संयमी बना रहता हैं।
४॰लौकिक - पारलौकिक कार्यों मे सफलता मिलती हैं।
५॰सभी देवी देवता मनुष्य की रक्षा करते हैं।
६॰सुषुम्ना रक्षा से मनुष्य स्वस्थ,बलिष्ठ ,तेजस्वी और दीर्घायु होता हैं।
७नेत्र्ज्योति सुरक्षित रहती हैं।
इस प्रकार धार्मिक,सांस्कृतिक,वैज्ञानिक सभी द्रष्टियों से शिखा की महत्ता स्पष्ट होती हैं। परंतु आज हिन्दू लोग पाश्चात्यों के चक्कर में पङकर फैशनेबल दिखने की होङ में शिखा नहीं रखते व अपने ही हाथों अपनी संस्कृति का त्याग कर डालते हैं।लोग हँसी उङाये, पागल कहे तो सब सह लो पर धर्म का त्याग मत करो। मनुष्य मात्र का कल्याण चाहने वाली अपनी हिन्दू संस्कृति नष्ट हो रही हैं। हिन्दु स्वयं ही अपनी संस्कृति का नाश करेगा तो रक्षा कौन करेगा।

Thursday, June 19, 2014

धर्म हिंसा तथैव च: ।। धर्म एव हतो हंति धर्मो रक्षति रक्षित:।।

।। अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च: ।। धर्म एव हतो हंति धर्मो रक्षति रक्षित:।।









jai baba banaras...

Wednesday, March 12, 2014

तुम बड़े अच्छे लगते हो....

क्या आप सेकुलर है.. मतलब धर्मनिरपेक्ष या मानवतावादी….. आदि जैसी विचारधारा के है तो आईये जरा मेरे इन प्रश्नों के उत्तर दीजिये -

केरल में विधायक, संसद और मंत्री अल्लाह,यीशु के नाम से सपथ लेते है | अगर हिंदू राम या कृष्ण के नाम से ले तो संबिधान के खिलाफ है ?

…अरबी भाषा को प्रमोट करने के लिए सरकार पैसे खर्च कर रही है | लेकिन संस्कृत पर क्यों नही ? क्या अरबी भाषा,संस्कृत के तुलना में अधिक राष्ट्रीय है ?

IMTD Act क़ानूनी अधिकार से असम में बंगलादेशियो को भारत में बसने और नागरिक बनने का अधिकार देता है | तो जम्मू और कश्मीर में शेष भारतीय को बसने का अशिकर क्यों नही ? यह दोगली निति क्या है ?

जब योगा संयुक्त राज्य अमेरिका में एक करोड़ों डॉलर का उद्योग है, हमारी सरकार क्यों अंधी बन गयी है इस तकनीक मानवविकास के लिए ? क्या इसलिए कि यह हिंदू संस्कृति का एक हिस्सा है ?

संविधान के अनुच्छेद 30 (A) के अनुसार गीता रामायण की शिक्षाएं विद्यालयों में पढ़ाना प्रतिबंधित है, जबकि मदरसों में कुरान और चर्चों में बाइबल की शिक्षाएं दी जाती हैं l और इसी का कारण है की 99.99% मुस्लिम उर्दू, अरबी, फारसी में कुरान पढ़ते हैं … परन्तु 99.99% हिन्दुओं ने कभी अपने धर्म-ग्रन्थ छुए भी नहीं होते l

पूजा में ‘संकल्प’ “भारत वर्षे , भारत कंडे……… के साथ शुरू होता है …”. ये क्या हैं? क्या आप को अभी भी लगता है कि अध्यात्मवाद और राष्ट्रवाद अलग कर रहेहैं ? ये राष्ट्र की दो आंखें है?

अध्यात्मवाद और राष्ट्रवाद भारत में अविभाज्य हैं.क्या आपको नहीं लगता कि अध्यात्मवाद के बिना भारत बिना आत्मा के एक शरीर की तरह हो जाएगा?

हिंदू धर्म में आप को सुधारको कि संख्या बहुत मिल जायेगी | अन्य धर्मो में क्यों नही पाई जाती है ? क्या इन्हें सुधारने कि जरुरत नही है कि सुधारे हुए है ?

समझौता ब्लास्ट केस में SIMI के प्रमुख सफदर नागौरी और उसके सथियों द्वारा जो जुर्म कबूला गया, उसी जुर्म को असीमंन्द जी द्वारा बुलवाया गया, अब ये कैसे सत्य हो सकता है की एक ही ट्रेन में एक बम ब्लास्ट किया लेकिन 2 गुट उसकी जिम्मेदार लेते हैं ?

पिछले वर्ष हज यात्रा पर 3000 करोड़ खर्च किये गए, क्या आज तक सरकार ने आंकड़े पेश किये हैं की अमरनाथ यात्रा पर से कितना चंदा बटोरा गया है और उनको किन कार्यों में लगाया गया है ?

वो प्रत्येक मन्दिर केंद्र सर्कार या राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित कर लिया जाता है जिसमे चढ़ाव बहुत ज्यादा चढ़ता है, और फिर सुरक्षा के नाम पर उनको shrine बोर्ड बनवा कर उनका अधिग्रहण किया जाता है l क्या सनातन धर्म की आस्था पर ही सुरक्षा का खतरा है … मस्जिदों और चर्चों में कोई खतरा नहीं लगता सरकारों को ?

धर्मान्तरण का कार्यक्रम आज के समय में किसी Corporate World की कार्यशैली से कमतर नहीं चलाया जा रहा l धर्मांतरण में कार्यरत प्रत्येक इसाई को भी किसी MNC कम्पनी की भाँती TARGET दिए जाते हैं … 1 सप्ताह में कम से कम 10 हिन्दुओं को इसाई बनाना l

...ये Targets पूरे भी होते हैं.. चाहे कितना भी पैसा बहाना पड़े, इसाई बना ही दिया जाता है l Funnda kya hai yaaar

अकेले हैदराबाद में ही प्रति रविवार 150 से ज्यादा धर्मान्तरण की Workshops आयोजित की जाती हैं, जिनमे सुरक्षा चक्र 12 level तक किया जाता है की कोई व्यक्ति केमरा तक न लेकर जाए अंदर l

30 सितम्बर 2010 को आये लखनऊ उच्च न्यायलय के निर्णय के बाद जब सुन्नी वक्फ बोर्ड के प्रमुख हाशिम अंसारी ने देश को 50 टुकड़ों में बांटने की धमकी दी तो उसको नजर अंदाज क्यों कर दिया गया?

आज भी वोही फारुक अब्दुल्ला संसद में बैठ कर भाषण देता है जो कश्मीर में Loud Speaker पर कहता था की इन हिन्दुओं के माथे पर गोली मारो… जहां पर ये टीका तिलक लगते हैं l

जम्मू और कश्मीर कि जनसंख्या लगभग एक करोड है जिन्हें 24000 करोड रुपये कि सहायता दी गयी है | यानी कि पर हेड 24000 रुपये | जबकि शेष राज्यों को इनसे 5% कम कि सहायता दी जाती है | क्या यह राष्ट्र विरोशियो के लिए इनाम नही है ?

यदि पेंटिंग करना गैर- इस्लामिक है तो मुसलमानों ने एम् एफ हुसैन के खिलाफ कितने फतवे जारी किये गए थे ? क्या वो गैर- इस्लामिक कार्य नही किया था ?

यदि इस्लाम में गायन, संगीत और नृत्य गैर- इस्लामिक है ( क्योकि इस्लाम एक गंभीर धर्म है ) तो बहुत “खान” फिल्म में अभिनय करते है | इनके खिलाफ फतवा क्यों नही जारी किया गया ?

क्या आप को लगता है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश रहेगा यदि मुसलमानों का बहुमत हो जाय तो ?

हॉउस आफ कामंस, आस्ट्रेलिया संसद और ह्वाईट हॉउस आदि में जब दीपावली और जन्माष्टमी मनाया जाता है तो भारत के संसद में क्यों नही मनाया जाता है ? क्या हम संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया कि तुलना में अधिक धर्मनिरपेक्ष है ?

यदि सांप्रदायिक दंगे भारत में आर एस एस, विहिप, बजरंग दल आदि के कारन होता हैतो “ पाकिस्तान, तुर्की, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया, चेचन्या, चीन, रूस, ब्रिटेन, स्पेन, साईप्रस आदि में किसकी अजह से दंगे होते है ?” जब कि वहाँ पर आर एस एस / विहिप नही है |

एक पूर्व राष्ट्रपति, दो पूर्व प्रधानमंत्रियों ­, साधुओ,और संतो द्वारा कांची के संकराचार्य कि गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन किया है |लेकिन मिडिया का कहना है कि “वहाँ बिलकुल कोई विरोध नही हुआ है”| क्या आप को लगता है कि केवल हिन्=हिंसा ही लोगो की [पीड़ा मापने का पैमाना है ?

क्या आप को विश्वास है कि इस्लाम और ईसाईयत को सर्वधर्म समभाव में विश्वासहै ? यदि हाँ, तो धर्म रूपांतरण में विश्वास क्यों करते है ?

ईश्वर अल्लाह तेरे नाम – आप मुझे एक मुसलमान दिखाए जो इससे सहमत हो ?

क्या आप को नही लगता है कि “ सेक्युलर मुस्लिम एक मिथ्या नाम है ? एक व्यक्ति या तो सेक्युलर या मुसलमान हो सकता है, दोनों नही ? एक मुस्लिम ( जो केवल अल्लाह में विश्वास करता है) धर्म-निरपेक्ष(क ­ई परमेश्वर में विश्वास) नही हो सकता है |

क्या आप जानते है कि “ तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मौलाना वहीदुद्दीन, जब भारतीय सैनिक कारगिल में लड़ रहे थे तो,उनसे सैनिको के लिए प्रार्थना करने को कहा गया तो इंकार कर दिया ? क्योकि भारतीय सैनिक मुसलमानों से लड़ रहे थे?” ( बाद में सोनिया और प्रियंका ने उसके अंतिम संस्कार में भाग ली थी )

संयुक्त राष्ट्र चार्टर का कहना है कि “ अल्पसंख्यक का मतलब पूरी आबादी का अधिक से अधिक 10% होता है | मुसलमान, जो लगाभाग 23% से ऊपर है को एक अल्पसंख्यक कैसे कहा जा सकता है ?

क्या आप को विश्वास है कि “कम्युनिस्टों को भारत से प्यार है ?”, जब कि वे स्वीकार करने से मना करते है कि 1962 में चीन भारत पर हमलावर था ? और भारतीय सरकार द्वारा सेना की तैनाती की आलोचना भी की थी ?

ये कैसे होता है कि “ एक मुस्लिम परिवार मुख्य रूप से हिंदू इलाके में शांति से रहता है, जबकि एक मुस्लिम बस्ती में एक हिंदू परिवार ऐसा करने में सक्षम नही है ?

मुस्लिम बहुत क्षेत्रो में ईसाई मिशिनारिज क्यों नही सामाजिक सेवाए शुरू कराती है ? क्योकि वहाँ निवेश पर पर्याप्त फल नहीं मिलेगा |

क्या आप जानते है कि “ भारत एक मात्र देश है जो खुले तौर पर बंगलादेश के घुसपैठियों को आमंत्रित किया है | बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सरकारों ने तत्काल उन्हें रासन कार्ड उपलब्ध कराके मतदाता बना दिया |”

दंगे शुक्रवार की नमाज के बाद ही ज्यादातर हुए है ( जैसे मरद, केरल) | क्या यह इमामों के ज्वलंत उपदेशो की वजह से नही है ?

सभी हिंदू बहुल क्षेत्र शांतिपूर्ण है, लेकिन सभी हिंदू अल्पसंख्यक क्षेत्र समस्याग्रस्त है – जम्मू और कश्मीर, उत्तर – पूर्वी भारत आदि | क्या आप इसकी व्याख्या कर सकते है कि ऐसा क्यों ?

एक विधायक, सी. पी. शाजी ने केरल विधानसभा में कहा कि “ वो हाथ काट दिया जायेगा, जो शरियत के एक अक्षर को छुयेगा” | क्या आप इससे सहमत है ?

क्या आप जानते है कि “भारत में अवैध रूपसे आये मुस्लिम अप्रवाशी 25 लोकसभा और 120 विधानसभा सीटों के चुनाव में एक निर्णायक कारक बन गए है ? और वे एक विशेष पार्टी के लिए एकजुट हो के मतदान करते है – कंग्रस, राजद, सपा, एमएल, या साम्यवादी |”

एक पाकिस्तानी भारतीय हो सकता है ? जब वह जम्मू और कश्मीर के किसी एक लडकी से शादी कर ले, लेकिन इसके विपरीत जब वही लड़की भारत के किसी भी हिस्से के एक हिंदू से शादी करे तो वह जम्मू और कश्मीर की नागरिक नहीं हो सकते है, जम्मू और कश्मीर कि नागरिकाता खो देती है ? यह किस तरह का कानून है ?

अयोध्या मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद पूछताछ की लेकिन बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी या आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड से सवाल नही की? क्या यह सुप्रीम कोर्ट का दुहरा मापदंड नही है ?

जब आप नरेन्द्र मोदी जैसे लोगो से तुच्छ आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा मांग रहे है तो आप क्यों नही जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री से इस्तीफा माँगते है ? जहां पर हजारों सैनिक आतंकवादियों द्वारा मार दिए गए है और तो और ४ लाख हिन्दुओ का सफाया कर दिया गया है |

जम्मू और कश्मीर का पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला एक ईसाई से शादी किया और वर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एक हिंदू लडकी से शादी करके आनंदित थे, लेकिन जब उसकी बेटी एक हिंदू लड़के से शादी कर ली तो उसका परित्याग कर दिया गया | क्या यही धर्मनिरपेक्षता का पहचान है ?

कानून के अनुसार “ मानव अंगों को किसी भी पार्टी के चुनाव चिन्ह के रूप में नही लिया जा सकता है” तो कैसे कांग्रेस पार्टी को ‘हाथ’ का प्रतिक आवंटित किया गया है ? यह कानून के खिलाफ नही है ?

दिल्ली इमाम सैयद बुखारी के घोषणा थी कि तालिबान सभी मुसलमानों के लिए आदर्श है और ओसामा बिन लादेन नायक ? क्या आप इस धर्मनिरपेक्षता पर विचार करेंगे ?

जम्मू और कश्मीर के संसदीय चुनाव के लिए 2 लाख हिंदू वयस्क मतदाता है | लेकिन विधानसभा के लिए नही ? क्यों ?

जम्मू और कश्मीर विधानसभा की अवधि 6 साल और अन्य राज्यों की 5 साल …. क्यों?

बंगलादेश में हिंदू लड़किया पीटी जाती है, उनके साथ गैंग रैप किया जाता है |

प्रतिदिन मंदिरों को जलने या नष्ट करने कि खबरे पढ़ते होंगे | क्या हमारे धर्मनिरपेक्षतावादी और मानवाधिकारी कार्यकर्ताओ को इनके लिए आवाज़ नही उठानी चाहिए ? क्या सिर्फ मुसलमानों केलिए ही मानवाधिकार है ?

क्या आप जानते है कि “ इस्लाम राष्ट्रवाद और राष्ट्रिय सीमाओ में विश्वास नही करता है | यह पूरी दुनिया को इस्लाम के तहत दारुल हरब से दारुल इस्लाम तक लाना चाहते है ?”

क्यों मुस्लिम मस्जिद और मदरसे में जाते है न कि स्कूल और कालेज में ? क्या मदरसा भी वैज्ञानिक और इंजिनियर तैयार करता है ? ( सेक्युलर नेताओ द्वारा मुसलमानों को अलग से आरक्षण के लिए अपना सर पिटने के सन्दर्भ में )

मुहर्रम जुलूस हिंदू बाहुल्य क्षेत्रो से लाया जा रहा है लेकिन हिंदू धार्मिक जुलूस मुस्लिम इलाको सेअनुमति नही है क्यों ? क्या यह सम्रदायिक बटवारे को स्थायी नही करता है ?

क्या आपको लगता है कि नेहरू परिवार ही एक परिवार है जो आजादी के लिए लड़े या अन्य स्वतंत्रता सेनानियों क भी थे? जैसे भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, मदनलाल धींगरा ,वन्शिनाथान, चापेकर ब्रदर्स, वीर सावरकर, राज गुरु, सुभाष चंद्र बोस, उधम सिंह आदि |

मल्लापुरम ( केरल) में , एक डाक्टर ने पाया कि मुस्लिम महिलाओ कि तीन पीढियां बेटी-13, माँ-26 और दादी – 39 सभी गर्भवती है तथा प्रसव के लिए भरती कराया | क्या आप को भी लगता है कि मुसलमानों के लिए परिवार नियोजन अनावश्यक है ?

रामायण के लेखक ऋषि वाल्मीकि एक डाकू थे, उसी तरह महाभारत के लेखक वेड व्यास एक मछुवारे थे | दोनों महाकाव्यो और लेखक हिन्दुओ द्वारा प्रतिष्ठित है | क्या अब भी लगता है कि हिंदू धर्म जातिवाद का समर्थन करता है ?

2002 में कर्नाटक सरकार मंदिरों द्वारा प्राप्त 72 करोड रुपयों में से 50 करोड मदरसों को, 10 करोड चर्च को, 10करोड मंदिरों को दिया गया | मदरसो (आतंकवादी कारखाना ) और चर्चो के विकास के लिए हिन्दुओ का पैसा क्या देना चाहिए ?

जब अफगानिस्तान में तालिबान, बुद्ध प्रतिमा को ध्वस्त कर दिया, तो टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है कि यह बाबरी मस्जिद के विध्वंस की प्रतिक्रिया में था. क्या आप टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा के इस औचित्य से सहमत? जैसे को तैसा के लिए ठीक है? तो फिर तुम क्यों गोधरा कांड की प्रतिक्रिया में गुजरात दंगों की आलोचना करते हो ?

पांडिचेरी में एक मुस्लिम को दफनाने से इनकार कर दिया गया था क्योंकि वह प्रभु मुरुगा के लिए एक मंदिर का निर्माण किया था क्या आप को भी लगता है कि “धर्म एक दूसरे से नफरत नहीं सिखाते हैं”?

1989 में कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में राजीव गाँधी ने घोषणा की कि “ अगर मिजोरम में कांग्रेस सत्ता में आई तो यहाँ बाईबल के अधर पर शिक्षाएदी जायेगी (?)” यदि यह सांप्रदायिक नही है तो क्या है ?

वर्ल्ड मुस्लिम अल्पसंख्य समुदाय के अध्यक्ष, कुवैत के शेख अल सईद युसूफ सयेद हासिम रिफाई को केरल में बिना वीजा के आने कि अनुमति दी गयी थी और उन्हें र्गिराफ्तर नही किया गया बल्कि केरल सर्कार के सरकारी दामाद की तरह खातिरदारी कि गयी और ले जाने लाने के लिए सरकारी कार कि व्यवस्था कि गयी थी | क्या यह राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने वाला कार्य है ?

यदि ब्रिटेन और अमेरिका( एक धर्म निरपेक्ष देश) में एक से अधिक महिला से शादी करने कि अनुमति नही है तो क्या भारत में एक से अधिक औरतो से शादी करने कि अनुमति देनी चाहिए ?

पोप को भारत कि यात्रा को आमंत्रित किया गया था लेकिन नेपाल के राजा महेंद्र को नागपुर में 1965 में मकरसंक्रांति समारोह में भाग लेने के लिए अनुमति नही दी गयी थी | क्या यही धर्म निरपेक्षता है ?

अशोक और कनिष्क अफगानिस्तान पर शासन किया. कंधारी जो की दुर्योधन की माँ, कंधार से आया है ( अब अफगानिस्तान में)| क्या आप मानते हैं कि अफगानिस्तान एकबार भारत का अभिन्न हिस्सा था?

त्रिपुरा में बैप्टिस्ट चर्च को न्यूजीलैंड से 60 साल पहले मिशनरियों द्वारा स्थापित किया गया था| क्या आपको लगता है कि चर्च राष्ट्रवाद को बढ़ावा देंगे?

पाकिस्तान में छात्रों को शुरू से ही सिखाया जाता है कि हिंदु हमारे दुश्मन हैं, हिंदू से मित्रता कभी नहीं किया जासकता है काफिरो (हिंदुओं) को मार देना चाहिए. क्या आप को अब भी लगता है कि दोस्ती पाकिस्तान के साथ संभव है?

पाकिस्तान इस्लामी देश है,बायीं-पास सर्जरी या कैंसर के इलाज के लिए भारत आते है | पाकिस्तान कैसा एक देश है जिसके पास परमाणु विकशित करने की क्षमता है लेकिन एक अच्छे अस्पताल कि नही ?इसका मतलब है कि पाकिस्तानी सिर्फ ट्रिगर से खुश है विकास और स्वास्थ्य सीवाओ की कीमत पर |

कम्युनिस्ट नेता स्टालिन की बेटी, स्वेतलाना, दिनेश सिंह के भाई से शादी करने के लिए और भारत में बसने की कामना की| हमारे साम्यवादियों और इंदिरा गांधी ने इस का विरोध किया | वे अब कैसे एक इतालवी महिला का समर्थन करे ?

विश्व में 52 मुस्लिम देश है, एक भी ऐसे मुस्लिम देश का नाम बताये जहा हज यात्रा पर सब्सिडी दी जाती है!

एक भी मुस्लिम राष्ट्र ऐसा बताये जहा हिन्दुओ को विशेष अधिकार दिए जाते है, जैसे की भारत में मुस्लिमो को ?

केवल एक देश ऐसा बताये जहा 85 % बहुसंख्य 15 % अल्पसंख्यकों के भोग के लिए शोषित जाते है !

एक मुस्लिम राष्ट्र ऐसा बताये जहा गैर-मुस्लिम राष्ट्राध्यक्ष बना हो !

एक ऐसा मुल्ला या मुलावी बताये जिसने आतंकवाद के विरुद्ध फतवा निकाला हो!

महाराष्ट्र,बिहार,केरल, पांडिचेरी (जहा हिन्दू बहुसंख्य है) जैसे राज्यों ने मुस्लिम मुख्यमंत्रियों को भी चुना है.. …क्या आप जम्मू-कश्मीर (जहा मुस्लिम बहुसंख्य है) में हिन्दू मुख्यमंत्री की कल्पना कर सकते है????????????

भारत – पकिस्तान के बटवारे के समय पकिस्तान में 24% हिन्दू थे जो की आज 1.5 % भी नहीं रहे! क्या कोई बता सकता है की गायब हुए हिन्दुओ के साथ क्या हुआ??? क्या हिन्दुओ के लिए भी कोई मानवाधिकार है ?

इसके बिलकुल विपरीत भारत में मुस्लिमो की संख्या 1951 में 10 % से बढ़कर 15% हो गयी है ! और हिन्दू 87.5% से 85% पर है! क्या फिर भी आप हिन्दुओ को कट्टरपंथी कहेगे?????????? ­?

जब हिन्दुओ ने मुसलमानों को अपने जमीन का 30% हिस्सा गुनगुनाते हुए दे दिया….तब उन्हें अपने ही भूमि पर अयोध्या और मथुरा जैसे पवित्र स्थलों के लिए क्यों भीख मांगनी पड रही है?????

गाँधी ने सरकारी खर्च से सोमनाथ मंदिर बनवाने के लिए विरोध किया था. तो फिर जनवरी 1948 में दिल्ली की मस्जिद का जीर्णोद्धार करवाने के लिए उन्होंने क्योँ सरदार पटेल पर दबाव डाला??????

गांधी ने ” खिलाफत आन्दोलन “(जिसे देश की आजादी से कोई लेना देना नहीं था) को समर्थन दिया था, इसके बदले में उन्होंने क्या पाया ?????????

जब महाराष्ट्र, बिहार में मुस्लिम और ईसाई अल्पसंख्यक है, तो फिर जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, मिझोरम में हिन्दू अल्पसंख्यक नहीं?????? हिन्दुओ को क्योँ अल्पसंख्यक अधिकारों से वंचित रखा जाता है ??????????

जब हज यात्रा के लिए सब्सिडी दी जाती है, तो अमरनाथ यात्रा, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर टैक्स क्यों लगाया जाता है????????????

जब ईसाई और मुस्लिम विद्यालयों में कुरआन और बाइबल पढाई जा सकती है, तो हिन्दू विद्यालयों में भागवद गीता क्योँ नहीं ???????????????

हिन्दुओ की समस्याए सामने आने के बजाय,क्या आपको नहीं लगता की किसी का हिन्दू होना ही एक समस्या है?

गोधरा के बाद छिड़े दंगो को एक हद से ज्यादा उठाया गया, बल्कि जहा 4 लाख हिन्दुओ का कश्मीर से पूर्ण रूप से पतन हुआ उसके बारे में कोई बात करने को भी तैयार नहीं.

मंदिरो के पैसो को मुस्लमान और ईसाइयों के उत्सवो में उडाया जाता है, यद्यपि मस्जीद और चर्च अपना पैसा अपने ढंग से खर्च करने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र है!!

अब्दूल रहमान अंतुले को मुंबई के सिध्धिविनायक मंदिर का ट्रस्टी बनाया गया, क्या कोई हिन्दू (जैसे की मुलायम सिंह यादव) किसी मदरसा या मस्जीद का ट्रस्टी बनकर दिखा सकता है????????

अगर हिन्दुओ को असहिष्णु कहा जाता है तो बताईये की कैसे मस्जीद और मदरसे दिनों दिन बढ़ते जा रहे है?

कैसे मुसलमानों को सड़क पर नमाज पढने दिया जाता है?
कैसे मुसलमानों को दिन में 5 बार लाउड स्पीकर पर ये कहने दिया जाता है की “अल्लाह के सिवाह दूसरा कोई भगवान् ही नहीं?

Thursday, February 13, 2014

नाशपाती का पेड़ एक कहानी ...

बहुत समय पहले की बात है , सुदूर दक्षिण में किसी प्रतापी राजा का राज्य था . राजा के तीन पुत्र थे, एक दिन राजा के मन में आया कि पुत्रों को को कुछ ऐसी शिक्षा दी जाये कि समय आने पर वो राज-काज सम्भाल सकें.
इसी विचार के साथ राजा ने सभी पुत्रों को दरबार में बुलाया और बोला , “ पुत्रों , हमारे राज्य में नाशपाती का कोई वृक्ष नहीं है , मैं चाहता हूँ तुम सब चार-चार महीने के अंतराल पर इस वृक्ष की तलाश में जाओ और पता लगाओ कि वो कैसा होता है ?” राजा की आज्ञा पा कर तीनो पुत्र बारी-बारी से गए और वापस लौट आये .
सभी पुत्रों के लौट आने पर राजा ने पुनः सभी को दरबार में बुलाया और उस पेड़ के बारे में बताने को कहा।
पहला पुत्र बोला , “ पिताजी वह पेड़ तो बिलकुल टेढ़ा – मेढ़ा , और सूखा हुआ था .”
“ नहीं -नहीं वो तो बिलकुल हरा –भरा था , लेकिन शायद उसमे कुछ कमी थी क्योंकि उसपर एक भी फल नहीं लगा था .”, दुसरे पुत्र ने पहले को बीच में ही रोकते हुए कहा .
फिर तीसरा पुत्र बोला , “ भैया , लगता है आप भी कोई गलत पेड़ देख आये क्योंकि मैंने सचमुच नाशपाती का पेड़ देखा , वो बहुत ही शानदार था और फलों से लदा पड़ा था .”
और तीनो पुत्र अपनी -अपनी बात को लेकर आपस में विवाद करने लगे कि तभी राजा अपने सिंघासन से उठे और बोले , “ पुत्रों , तुम्हे आपस में बहस करने की कोई आवश्यकता नहीं है , दरअसल तुम तीनो ही वृक्ष का सही वर्णन कर रहे हो . मैंने जानबूझ कर तुम्हे अलग- अलग मौसम में वृक्ष खोजने भेजा था और तुमने जो देखा वो उस मौसम के अनुसार था.
मैं चाहता हूँ कि इस अनुभव के आधार पर तुम तीन बातों को गाँठ बाँध लो :
पहली, किसी चीज के बारे में सही और पूर्ण जानकारी चाहिए तो तुम्हे उसे लम्बे समय तक देखना-परखना चाहिए . फिर चाहे वो कोई विषय हो ,वस्तु हो या फिर कोई व्यक्ति ही क्यों न हो ।
दूसरी, हर मौसम एक सा नहीं होता , जिस प्रकार वृक्ष मौसम के अनुसार सूखता, हरा-भरा या फलों से लदा रहता है उसी प्रकार मनुषय के जीवन में भी उतार चढाव आते रहते हैं , अतः अगर तुम कभी भी बुरे दौर से गुजर रहे हो तो अपनी हिम्मत और धैर्य बनाये रखो , समय अवश्य बदलता है।
औरतीसरीबात , अपनी बात को ही सही मान कर उस पर अड़े मत रहो, अपना दिमाग खोलो , और दूसरों के विचारों को भी जानो। यह संसार ज्ञान से भरा पड़ा है , चाह कर भी तुम अकेले सारा ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते , इसलिए भ्रम की स्थिति में किसी ज्ञानी व्यक्ति से सलाह लेने में संकोच मत करो।


जय बाबा बनांरस....

Thursday, February 6, 2014

ब्राह्मणों को आरक्षण की भीख नहीं चाहिए ....

आजकल दलाल मीडिया के कुछ दलाल आरक्षण के मुददे पर बहुत बहस करवा रहे है ...

आरक्षण कियु और किसको दिया जाये ....

आरक्षण और सब्सिडी की भीख कांग्रेस ने देनी शुरु की क्या कांग्रेस से पहले आरक्षण हम सबको भीख की तरह दी जाती थी और क्या आरक्षण की जरुरत थी ..जवाब क्या है ?

एक बात और जान बूझ कर ब्राह्मणों को निशाना बनाया जाता है कुछ लोगो का पैनल बना कर एक ब्राह्मण को उसमे बुला कर उसके साथ जातिगत घेर कर उसको जलील करने की कोशिश की जाती है ....

ब्राह्मणों को आरक्षण की भीख नहीं चाहिए ....

जय बाबा बनारस....



Thursday, January 2, 2014

जंगल के कुत्ते और उनका आपसी प्रेम ...

एक दिन की घटना : जंगल में दो कुत्ते एक जंगल में आपस में लड़ रहे थे।।
उसने एक कुत्ता ऐसा था जो अपने को दुसरे कुत्ते से ज्यादा इमानदार बताता था।। दोनों कुत्ते जोर जोर से एक दुसरे पर खूब भोंक रहे थे तभी एक बिजनेसमैन बाज जो की इटली की एक कुतिया के इशारे पर जंगल में आया उसने दोनों कुत्तों की एक फाइव स्टार गुफा में मीटिंग करायी और कहा की यदि तुम लोग ऐसे ही लड़ते रहे तो शिकार नहीं कर पाओगे और जंगल में सज्जनो और शाकाहारियों की सत्ता हो जाएगी एवं जंगल स्वर्ग बन जायेगा ।।
एक काम करो तुम दोनों एक दुसरे पर थोडा थोडा भोंको मगर एक दुसरे को कभी काटना मत और शिकार करते रहो मिल बाट कर खाओ इस प्रकार इटली की कुतिया भी खुश रहेगी जिसने मुझे यहाँ भेजा है और इस जंगल में शेर नहीं आएगा।। इस प्रकार दोनों कुत्तों में समझौता और गठबंधन हो गया।।
थोड़े दिन बाद : दो कुत्ते एक दुसरे के ऊपर भोक भोंक कर मिल बाट कर शिकार खा रहे थे।।



जय बाबा बनारस .....

Tuesday, December 31, 2013

जिस तरह से एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना सकता है ठीक उसी तरह से एक गद्दार देश को गुलाम बना सकता है ....

राजीव dixit की स्पीच ....का एक पार्ट मीर जाफर एक देश का गद्दार ...
मेरे एक परिचित है प्रोफेसर धरमपाल, वो ४० वर्ष तक यूरोप में रहे है, मैंने एक बार उनको एक चिट्ठी लिखी, मैंने कहा सर, मै ये जानना चाहता हु बेसिक क्वेश्चन कि पलासी के युद्ध में अंग्रेजो के पास कितने सिपाही थे. तो उन्होंने कहा देखो राजीव, अगर तुमको ये जानना है तो बहुत कुछ जानना पड़ेगा, और तुम तैयार हो जानने के लिए, तो मैंने कहा मै सब जानना चाहता हु. मै इतिहास का विद्यार्थी नहीं लगा लेकिन इतिहास को समझना चाहता हु कि ऐसी कौन सी ख़ास बात थी जो हम अंग्रेजो के गुलाम हो गए, ये समझ में तो आना चाहिए अपने को, कि कैसे हम अंग्रेजो के गुलाम हो गए. ये इतना बड़ा देश, ३४ करोड़ की आबादी वाला देश ५० हजार अंग्रेजो का गुलाम कैसे हो गया ये समझना चाहिए. तो वो पलासी के युद्ध पर से वो समझ में आया. उन्होंने कुछ दस्तावेज़ मुझे भेजें, फोटोकॉपी करा के और मेरे पास अभी भी है. उन दस्तावेजो को जब मै पढता था तो मुझे पता चला कि पलासी के युद्ध में अंग्रेजो के पास मात्र ३०० सिपाही थे, ३ हंड्रेड. और सिराजुद्दोला के पास १८,००० सिपाही थे. अब किसी भी सामने के विद्यार्थी से, बच्चे से, या सामान्य बुद्धि के आदमी से आप ये पूछो के एक बाजु में ३०० सिपाही, और दुसरे बाजु में १८,००० सिपाही, कौन जीतेगा? १८,००० सिपाही जिनके पास है वो जीतेगा. लेकिन जीता कौन ? जिनके पास मात्र ३०० सिपाही थे वो जीत गए, और जिनके पास १८,००० सिपाही थे वो हार गए. और हिंदुस्तान के, भारतवर्ष के एक एक सिपाही के बारे में अंग्रेजो के पार्लियामेंट में ये कहा जाता था कि भारतवर्ष का १ सिपाही अंग्रेजो के ५ सिपाही को मारने के लिए काफी है, इतना ताकतवर, तो इतने ताकतवर १८,००० सिपाही अंग्रेजो के कमजोर ३०० सिपाहियो से कैसे हारे ये बिलकुल गम्भीरता से समझने की जरुरत है. और उन दस्तावेजो को देखने के बाद मुझे पता चला कि हम कैसे हारे. अंग्रेजो की तरफ से जो लड़ने आया था उसका नाम था रोबर्ट क्लाइव, वो अंग्रेजी सेना का सेनापति था. और भारतवर्ष की तरफ से जो लड़ रहा था सिराजुद्दोला, उसका भी एक सेनापति था, उसका नाम था मीर जाफ़र. तो हुआ क्या था रोबर्ट क्लाइव ये जनता था कि अगर भारतीय सिपाहियो से सामने से हम लड़ेंगे तो हम ३०० लोग है मारे जाएँगे, १ घंटे भी युद्ध नहीं चलेगा. और क्लाइव ने इस बात को कई बार ब्रिटिस पार्लियामेंट को चिट्ठी लिख के कहा था. क्लाइव की २ चिट्ठियाँ है उन दस्तावेजो में, एक चिट्ठी में क्लाइव ने लिखा कि हम सिर्फ ३०० सिपाही है, और सिराजुद्दोला के पास १८००० सिपाही है. हम युद्ध जीत नहीं सकते है, अगर ब्रिटिश पार्लियामेंट अंग्रेजी पार्लियामेंट ये चाहती है कि हम पलासी का युद्ध जीते, तो जरुरी है कि हमारे पास और सिपाही भेजे जाए. उस चिट्ठी के जवाब में क्लाइव को ब्रिटिश पार्लियामेंट की एक चिट्ठी मिली थी और वो बहुत मजेदार है उसको समझना चाहिए. उस चिट्ठी में ब्रिटिश पार्लियामेंट के लोगों ने ये लिखा कि हमारे पास इससे ज्यादा सिपाही है नहीं. क्यों नहीं है ? क्योकि १७५७ में जब पलासी का युद्ध शुरु होने वाला था उसी समय अंग्रेजी सिपाही फ़्रांस में नेपोलियन बोनापार्ट के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे. और नेपोलियन बोनापार्ट क्या था अंग्रेजो को मार मार के फ़्रांस से भगा रहा था. तो पूरी की पूरी अंग्रेजी ताकत और सेना नेपोलियन बोनापार्ट के खिलाफ फ़्रांस में लडती थी इसी लिए वो ज्यादा सिपाही दे नहीं सकते थे, तो उन्होंने कहा अपने पार्लियामेंट में कि हम इससे ज्यादा सिपाही आपको दे नहीं सकते है. जो ३०० सिपाही है उन्ही से आपको पलासी का युद्ध जीतना होगा. तो रोबर्ट क्लाइव ने apaaaaaaaaaअपने दो जासूस लगाए, उसने कहा देखो युद्ध लड़ेंगे तो मारे जाएँगे, अब आप एक काम करो, उसने दो अपने साथिओं को कहा कि आप जाओ और सिराजुद्दोला की आर्मी में पता लगाओ कि कोई ऐसा आदमी है क्या जिसको रिश्वत दे दें. जिसको लालच दे दें. और रिश्वत के लालच में जो अपने देश से गद्दारी करने को तैयार हो जाए, ऐसा आदमी तलाश करो. उसके दो जासूसों ने बराबर सिराजुद्दोला की आर्मी में पता लगाया कि हां एक आदमी है, उसका नाम है मीर जाफर, अगर आप उसको रिश्वत दे दो, तो वो हिंदुस्तान को बेंच डालेगा. इतना लालची आदमी है. और अगर आप उसको कुर्सी का लालच दे दो, तब तो वो हिंदुस्तान की ७ पुश्तो को बेंच देगा. और मीर जाफर क्या था, मीर जाफर ऐसा आदमी था जो रात दिन एक ही सपना देखता था कि एक न एक दिन मुझे बंगाल का नवाब बनना है. और उस ज़माने में बंगाल का नवाब बनना ऐसा ही होता था जैसे आज के ज़माने में बहुत नेता ये सपना देखते है कि मुझे हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री बनना है, चाहे देश बेंचना पड़े. तो मीर जाफर के मन का ये जो लालच था कि मुझे बंगाल का नवाब बनना है. माने कुर्सी चाहिए, और मुझे पूंजी चाहिए, पैसा चाहिए, सत्ता चाहिए और पैसा चाहिए. ये दोनो लालच उस समय मीर जाफर के मन में सबसे ज्यादा प्रबल थे, तो उस लालच को रोबर्ट क्लाइव ने बराबर भांप लिया. तो रोबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर को चिट्ठी लिखी है. वो चिट्ठी दस्तावेजो में मौजूद है और उसकी फोटोकोपी मेरे पास है. उसने चिट्ठी में दो ही बातें लिखी है, देखो मीर जाफर अगर तुम अंग्रेजो के साथ दोस्ती करोगे, और ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ समझौता करोगे, तो हम तुमको युद्ध जीतने के बाद बंगाल का नवाब बनाएँगे. और दूसरी बात कि जब आप बंगाल के नवाब हो जाओगे तो सारी की सारी सम्पत्ति आपकी हो जाएगी. इस सम्पत्ति में से ५ टका हमको दे देना, बाकि तुम जितना लूटना चाहो लुट लो. मीर जाफर चूँकि रात दिन ये ही सपना देखता था कि किसी तरह कुर्सी मिल जाए, और किसी तरह पैसा मिल जाए, तुरंत उसने वापस रोबर्ट क्लाइव को चिट्ठी लिखी और उसने कहा कि मुझे आपकी दोनों बातें मंजूर है. बताईए करना क्या है ? तो आखरी चिट्ठी लिखी है रोबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर को कि आपको सिर्फ इतना करना है कि युद्ध जिस दिन शुरु होगा, उस दिन आप अपने १८,००० सिपाहियो को कहिए की वो मेरे सामने सरेंडर कर दें बिना लड़े. मीर जाफर ने कहा कि आप अपनी बात पे कायम रहोगे ? मुझे नवाब बनाना है आपको. तो रोबर्ट ने कहा कि बराबर हम अपनी बात पे कायम है, आपको हम बंगाल का नवाब बना देंगे. बस आप एक ही काम करो कि अपनी आर्मी से कहो, क्योकि वो सेनापति था आर्मी का, तो आप अपनी आर्मी को आदेश दो कि युद्ध के मैदान में वो मेरे सामने हथियार डाल दे, बिना लड़े, मीर जाफर ने कहा कि ऐसा ही होगा. और युद्ध शुरु हुआ २३ जून १७५७ को. इतिहास की जानकारी के अनुसार २३ जून १७५७ को युद्ध शुरु होने के ४० मिनट के अंदर भारतवर्ष के १८,००० सिपाहियो ने मीर जाफर के कहने पर अंग्रेजो के ३०० सिपाहियो के सामने सरेंडर कर दिया.

रोबर्ट क्लाइव ने क्या किया कि अपने ३०० सिपाहियो की मदद से हिंदुस्तान के १८,००० सिपाहियो को बंदी बनाया, और कलकत्ता में एक जगह है उसका नाम है फोर्ट विलियम, आज भी है, कभी आप जाइए, उसको देखीए. उस फोर्ट विलियम में १८,००० सिपाहियो को बंदी बना कर ले गया. १० दिन तक उसने भारतीय सिपाहियो को भूखा रखा और उसके बाद ग्यारहवे दिन सबकी हत्या कराई. और उस हत्या कराने में मीर जाफ़र रोबर्ट क्लाइव के साथ शामिल था, उसके बाद रोबर्ट क्लाइव ने क्या किया, उसने बंगाल के नवाब सिराजुद्दोला की हत्या कराई मुर्शिदाबाद में, क्योकि उस जमाने में बंगाल की राजधानी मुर्शिदाबाद होती थी, कलकत्ता नही. सिराजुद्दोला की हत्या कराने में रोबर्ट क्लाइव और मीर जाफ़र दोनों शामिल थे. और नतीजा क्या हुआ ? बंगाल का नवाब सिराजुद्दोला मारा गया, ईस्ट इंडिया कंपनी को भागने का सपना देखता था इस देश में वो मारा गया, और जो ईस्ट इंडिया कंपनी से दोस्ती करने की बात करता था वो बंगाल का नवाब हो गया, मीर जाफ़र. इस पुरे इतिहास की दुर्घटना को मै एक विशेष नजर से देखता हु. मै कई बार ऐसा सोंचता हु कि क्या मीर जाफ़र को मालूम नहीं था कि ईस्ट इंडिया कंपनी से दोस्ती करेंगे तो इस देश की गुलामी आएगी ? मिर जाफ़र जानता था इस बात को. मीर जाफ़र बराबर जानता था कि मै मेरे कुर्सी के लालच में जो खेल खेल रहा हु उस खेल में इस देश को सैंकड़ो वर्षो की गुलामी आ सकती है. ये वो जनता था. और ये भी जानता था कि अपने स्वार्थ में, अपने लालच में मै जो गद्दारी करने जा रहा हु इस देश के साथ उसके क्या दुष्परिणाम होंगे, वो भी उसको मालूम थे.

मै ऐसा सोंचता हु कि हम गुलामी से आजाद हो जाते, क्योकि १८,००० सिपाही हमारे पास थे और ३०० अंग्रेज सिपाहियो को मारना बिलकुल आसन काम था हमारे लिए. हम १७५७ में ही अंग्रेजो की गुलामी से आजाद हो जाते एक बात और दूसरी बात ये जो २०० वर्षो की गुलामी हमको झेलनी पड़ी १७५७ से १९४७ तक, और उस २०० वर्ष की गुलामी को भागने के लिए ६ लाख लोगों की जो क़ुरबानीयां हमको देनी पड़ी, वो बच गया होता. भगत सिंह, चंद्रशेखर, उधम सिंह, तांत्या टोपे, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, सुभाष चन्द्र बोस, ऐसे ऐसे नौजवानों की कुर्बानिया दी है ये कोई छोटे मोटे लोग नहीं थे. सुभाष चन्द्र बोस तो आईपीएस टोपर थे, उधम सिंह चाहता तो ऐयासी कर सकता था, बड़े बाप का बेटा था. भगत सिंह और चंद्रशेखर की भी यही हैसियत थी. चाहते तो जिन्दगी की, जवानी की रंगरलियां मानते और अपनी नौजवानी को ऐसे फंदे में नहीं फ़साते. ये सारे वो नौजवान थें जिनका खून इस देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण था. ६ लाख ऐसे नौजवानों की कुर्बानियां जो हमने दी, वो नहीं देनी पड़ती. और अंग्रेजो की जो यातनाए सही, जो अपमान हमने बर्दास्त किया, वो नहीं करना पड़ता अगर एक आदमी नहीं होता, मीर जाफ़र. लेकिन चूँकि मीर जाफ़र था, मीर जाफ़र का लालच था, कुर्सी का और पैसे का, उस लालच ने इस देश को २०० वर्ष के लिए गुलाम बना दिया.

आज तो देश मैं बहुत से मीर जाफर है ....

जय बाबा बनारस....

Friday, December 27, 2013

अवसर बड़ा या छोटा नही होता है

एक बार एक ग्राहक चित्रो की दुकान पर गया । उसने
वहाँ पर अजीब
से चित्र देखे । पहले चित्र मे चेहरा पूरी तरह बालो से
ढँका हुआ था और पैरोँ मे पंख थे ।एक दूसरे चित्र मे सिर
पीछे से गंजा था।
ग्राहक ने पूछा – यह चित्र किसका है?
दुकानदार ने कहा – अवसर का ।
ग्राहक ने पूछा – इसका चेहरा बालो से ढका क्यो है?
दुकानदार ने कहा -क्योंकि अक्सर जब अवसर आता है
तो मनुष्य उसे पहचानता नही है ।
ग्राहक ने पूछा – और इसके पैरो मे पंख क्यो है?
दुकानदार ने कहा – वह इसलिये कि यह तुरंत वापस
भाग जाता है, यदि इसका उपयोग न हो तो यह तुरंत
उड़ जाता है ।
ग्राहक ने पूछा – और यह दूसरे चित्र मे पीछे से
गंजा सिर किसका है?
दुकानदार ने कहा – यह भी अवसर का है ।
यदि अवसर को सामने से ही बालो से पकड़ लेँगे तो वह
आपका है ।अगर आपने उसे थोड़ी देरी से पकड़ने
की कोशिश की तो पीछे का गंजा सिर हाथ आयेगा और
वो फिसलकर निकल जायेगा । वह ग्राहक इन
चित्रो का रहस्य जानकर हैरान था पर अब वह बात
समझ चुका था ।
दोस्तो,
आपने कई बार दूसरो को ये कहते हुए
सुना होगा या खुद भी कहा होगा कि ’हमे अवसर
ही नही मिला’ लेकिन ये अपनी जिम्मेदारी से भागने
और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है ।
असल  मे भगवान ने हमे ढेरो अवसरो के बीच जन्म
दिया है । अवसर हमेशा हमारे सामने से आते जाते
रहते है पर हम उसे पहचान नही पाते या पहचानने मे
देर कर देते है । और कई बार हम सिर्फ इसलिये चूक
जाते है क्योकि हम बड़े अवसर के ताक मे रहते हैं ।
पर अवसर बड़ा या छोटा नही होता है । हमे हर अवसर
का भरपूर उपयोग करना चाहिये ....


जय बाबा बनारस....

Wednesday, December 25, 2013

भारतीय संस्कृति तथा सनातन धर्म के सच्चे रक्षक

25 दिसंबर 1861 को इलाहाबाद में जन्में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रणेता महामना पंडित मदन मोहन मालवीय इस युग के आदर्श पुरुष थे। महामना भारतीय संस्कृति तथा सनातन धर्म के सच्चे रक्षक थे।
पंडित जी ने अपने कार्य और लेखन के जरिए अंग्रेजों को हमेशा परेशान किया था। अपने जीवन-काल में पत्रकारिता, वकालत, समाज-सुधार, मातृ-भाषा तथा भारतमाता की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वाले इस महामानव ने जिस विश्वविद्यालय की स्थापना की उसमें उनकी परिकल्पना ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षित करके देश सेवा के लिए तैयार करने की थी, जो देश का मस्तक गौरव से ऊचा कर सकें। यह द्रष्टव्य है कि महामना मालवीय सत्य, ब्रह्मचर्य, व्यायाम, देशभक्ति तथा आत्म-त्याग में इस देश में अद्वितीय स्थान रखते थे। इस बात को दोहराने की आवश्यकता नहीं है कि उपर्युक्त समस्त आचरण पर महामना सदैव उपदेश ही नहीं देते थे, परन्तु उसका सर्वथा पालन भी किया करते थे। तीन बार अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहने के बावजूद अपने व्यवहार में महामना सदैव मृदुभाषी रहे। कर्म ही उनका जीवन था। ढेर सारी संस्थाओं के जनक एवं सफल संचालक के रूप में उनकी विधि-व्यवस्था का सुचारू सम्पादन करते हुए भी रोष अथवा कड़ी बोली का प्रयोग कभी नहीं किया। 12 नवंबर 1946 को यह महान आत्मा स्वर्ग सिधार गई।

लोगों को संस्कृति, साहित्य और शिक्षा से जोड़ने का काम करने वाले महामना को हम सबका महा-नमन। देश के विकास के लिए हमें महामना के बताए मार्ग पर चलने के साथ दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना होगा।


जय बाबा बनारस....