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Sunday, January 2, 2011

महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केस

महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केसफसा हुआ है मामला,
अक्ल बङी या भैंसअक्ल बङी या भैंस, दलीलें बहुत सी आयींमहामूर्ख दरबार की अब,
देखो सुनवाईमंगल भवन अमंगल हारी- भैंस सदा ही अकल पे भारी
भैंस मेरी जब चर आये चारा- पाँच सेर हम दूध निकाराकोई
अकल ना यह कर पावे- चारा खा कर दूध बनावेअक्ल घास जब चरने जाये-
हार जाय नर अति दुख पायेभैंस का चारा लालू खायो-
निज घरवारि सी।एम। बनवायोतुमहू भैंस का चारा खाओ-
बीवी को सी।एम. बनवाओमोटी अकल मन्दमति होई- मोटी भैंस
दूध अति होईअकल इश्क़ कर कर के रोये- भैंस का
कोई बाँयफ्रेन्ड ना होयेअकल तो ले मोबाइल घूमे-
एस।एम।एस। पा पा के झूमेभैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे-
कबहूँ मिस्ड काल ना मारेभैंस कभी सिगरेट ना पीती- भैंस बिना दारू के जीतीभैंस
कभी ना पान चबाये - ना ही इसको ड्रग्स सुहायेशक्तिशालिनी
शाकाहारी- भैंस हमारी कितनी प्यारीअकलमन्द को
कोई ना जाने- भैंस को सारा जग पहचानेजाकी
अकल मे गोबर होये- सो इन्सान पटक
सर रोयेमंगल भवन अमंगल हारी- भैंस का गोबर अकल पे भारीभैंस
मरे तो बनते जूते- अकल मरे तो पङते जूते...