महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केसफसा हुआ है मामला,
अक्ल बङी या भैंसअक्ल बङी या भैंस, दलीलें बहुत सी आयींमहामूर्ख दरबार की अब,
देखो सुनवाईमंगल भवन अमंगल हारी- भैंस सदा ही अकल पे भारी
भैंस मेरी जब चर आये चारा- पाँच सेर हम दूध निकाराकोई
अकल ना यह कर पावे- चारा खा कर दूध बनावेअक्ल घास जब चरने जाये-
हार जाय नर अति दुख पायेभैंस का चारा लालू खायो-
निज घरवारि सी।एम। बनवायोतुमहू भैंस का चारा खाओ-
बीवी को सी।एम. बनवाओमोटी अकल मन्दमति होई- मोटी भैंस
दूध अति होईअकल इश्क़ कर कर के रोये- भैंस का
कोई बाँयफ्रेन्ड ना होयेअकल तो ले मोबाइल घूमे-
एस।एम।एस। पा पा के झूमेभैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे-
कबहूँ मिस्ड काल ना मारेभैंस कभी सिगरेट ना पीती- भैंस बिना दारू के जीतीभैंस
कभी ना पान चबाये - ना ही इसको ड्रग्स सुहायेशक्तिशालिनी
शाकाहारी- भैंस हमारी कितनी प्यारीअकलमन्द को
कोई ना जाने- भैंस को सारा जग पहचानेजाकी
अकल मे गोबर होये- सो इन्सान पटक
सर रोयेमंगल भवन अमंगल हारी- भैंस का गोबर अकल पे भारीभैंस
मरे तो बनते जूते- अकल मरे तो पङते जूते...