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Thursday, October 17, 2013

हम सेक्युलर ....है

अपनी संस्कृति को विकृत बनाने के लिए सबसे पहला हमला हम हिन्दू ही करते हैं .. जिससे लोग हमको समझदार और बुद्धिजीवी कह सकें....किसी भी संत.. अथवा पूज्य पर नकारात्मक टिप्पड़ी करने वाले कृपया पहले सभी तथ्यों को जान लें.. तब अपना ज्ञान बघारें.. और मजे की बात ये है कि यहीं बुद्धिजीवी जमीन के अन्दर दबे हुए एक सड़े हुए शव की मजार पर मत्था टेकते दिखाई देते हैं ..


सबसे पहले कुछ सेक्युलर कीड़े इस काम की सुरुआत करते है और बाद मैं अपने ही धरम और धरम के लोगो की बुराई करते है अगर सेक्युलर कीड़ो को हिन्दू धरम इतना ही बुरा लगता है तो अपना धरम बदल कर जो धरम उनको अच्छा लगत है उस धरम को अपना कर फिर उस धरम की बुराई करे ....उस दिन पता लगेगा की हिन्दू धरम कितना बुरा है .....

हम सेक्युलर नहीं है ...

जय बाबा बनारस ....

Friday, May 17, 2013

वापिस इनको भेजेगा कौन ?

मुस्लिम रेजिमेंट या मुस्लिम राईफल्स नाम क्यूँ नहीं है.
आपको पता है की भारतीय सेना में सभी तरह के रेजिमेंट फ़ोर्स हैं जैसे की
राजपुताना राईफल्स, राजपुताना रेजिमेंट, सीख राईफल्स, सीख रेजिमेंट मराठा रेजिमेंट, गुजरात राइफल्स, जाट रेजिमेंट, इसी तरह के सभी राज्यों के आधार पर रेजिमेंट बनायें गए हैं और उस रेजिमेंट में वही सेना है
जिस नामसे वो रेजिमेंट बनाया गया है. दोस्तों क्या आपको पता है मुस्लिम रेजिमेंट या मुस्लिम राईफल्स नाम क्यूँ नहीं है.
कहानी तो बहुत लंबी है संक्षिप्त में बता रही हूँ...
1965 में जब पाकिस्तान के साथ युद्ध हुआ था उस वक्त मुस्लिम रेजिमेंट और मुस्लिम राईफल्स को हमला करने के आदेश जारी किये उस वक्त मुस्लिम रेजिमेंट और मुस्लिम राईफल्स ने पाकिस्तान परहमला करने से साफ़ मना कर दिया था और लगभग बीस हज़ार मुस्लिम सेना ने पाकिस्तान के सामने अपने
हथियार दाल दिए थे जिस वजह से उस वक्त भारत को काफि मुश्किलों सामना करना पड़ा था क्यूँ की मुस्लिम राईफल्स और मुस्लिम रेजिमेंट के ऊपर बहुत ज्यादा यकीन कर के इनको भेजा गया था. लेकिन इसके बाद इन दोनों को हटा दिया गया उसके बाद 1971 में पाकिस्तान के साथ फिर युद्ध हुआ उस वक्त
सेना में एक भी मुस्लिम नहीं था उस वक्त भारत ने पाकिस्तान के नब्बे हज़ार सेना के हथियार डलवा कर उनको बंदी बना लिया था और लिखित तौर पर आत्मसमर्पण करवाया था ।।
तब से लेकर आज तक भारतीय सेना में मुस्लिम रेजिमेंट या मुस्लिम राईफल्स नाम की कोई सेना नही है. मुस्लिम रेजिमेंट ने सन 65 मे पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ने से साफ़ इंकार कर दिया,.
इस वजह से इनकी पूरी की पूरी रेजिमेंट पर ही बैन लगा दिया गया, और पूरे रेजिमेंट को ही खत्म कर दिया गया, क्योंकि भारत की असली जंग तो हमेशा ही पाकिस्तान के साथ होती है, और फिर यदि जंग के अहम मौके पर आकर कोई
रेजिमेंट जंग लड़ने से मना कर देगी फिर उसे रखने से क्या फायदा?


५ करोड़ बंगला देशी भारत में
कांग्रेस गूंगी
भारतीय जनता पार्टी ने रखा मौन !
वापिस इनको भेजेगा कौन ?


जय बाबा बनारस .....

Saturday, January 5, 2013

आँकडे.....

आज आपके सामने मैँ बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य 
रखने जा रह हैं आशा करते हैं कि आप ध्यान देँगे

ये सभी आँकडे 2012 के हैँ...!!

#भारत मेँ 33 हजार काँलेज हैँ परन्तु इनमे से
एक भी विश्व के 200 मे नहीँ है

#विश्व शिक्षा सूची मेँ शामिल 181 देशोँ मेँ भारत का
स्थान 150 के करीब है

#गुणवत्ता के हिसाब से 73 देशोँ मेँ 72 वे स्थान पर है

#बी ए के 10 ग्रेजुएट मेँ से मात्र 1 नौकरी के लायक है

# बी टेक के 4 ग्रेजुएट मेँ से मात्र 1 नौकरी के लायक है

#प्राथमिक स्कूलोँ मे 78% बच्चे दाखिला लेते हैँ पर
मात्र 13% उच्च अर्थात 6 कक्षा मेँ दाखिला लेते हैँ

#भारत के 90% मेँ से 70% विश्वविश्व विद्यालय औसत दर्जे
की शिक्षा भी नहीँ दे पा रहे...!!

इसके मुख्य कारण:

#हालाँकि देश कि जिनके पास हैसियत है वो अपना पेट काट कर
#हमे बचपन से 33%अंक लाने की आदत डाल कर देश मेँ गधे पैदा
किये जाते हैँ तथा गरीब को गरीब बना कर रखा जाता है

अपने बच्चे पब्लिक स्कूलोँ मेँ पढाते पाते हैँ

#देश की 75% से ज्यादा आबादी जो 20 रुपये रोज की मोहताज है
वो क्या करे?


जय बाबा बनारस।।।।

Thursday, October 7, 2010

अपुना झंकल करे कहे आवा दददा दू कचौरी तोहाऊ खा ले

गाँव में एक कहावत है ,
घर में नहीं है दाने अम्मा गयी है भुजाने ,
कुल सत्तर करोड़ का गुब्बारा खाली हवा में उड़ा दिया पूरी दुनिया ने उसको देखा - वाह वाह मिली.
यह उन लोगो नें भी देखा जो भारत को एक भिखारियों और सपेरों का देश कहा करते है.
आज भारत का किसान आत्महत्या कर रहा है .और सरकार सत्तर करोड़ का गुब्बारा
हवा में उड़ा रही है ....... आज हर मंदिर के बाहर भिखारी खड़ा है यह सब सरकार की देन हैं.
आज दिल्ली का भिखारी गंगा किनारे हरद्वार और गर्मुक्तेश्वर में ट्रक भर कर भेज दिए गए. मात्र इसलिए कि इस सरकारी खुशी के मौके पर कोई ग़मगीन न दिखे.

कल को वोह फिर दिल्ली में आ जायेंगे.

कल जब नशा उतरेगा तब समझ में आयगा की यह सब तो भारत की जनता का खून पसीना का पैसा था. क्या किसी सांसद ने खेल के नाम पर अपने पूजी का कोई एक रूपया लगाया है.............

तो फिर भारत के माध्यम वर्ग की पूंजी (जो आयकर द्वारा सरकार को प्राप्त हुई) ही क्योंकर बर्बाद हुई........ जनता जवाब मांगती है.