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Sunday, September 8, 2013

शौर्य और पराक्रम

क्या आप जानते हैं कि.... आताताई औरंगजेब की मृत्यु कैसे हुई
थी....????? दरअसल... औरंगजेब ...और, हिन्दुओं के प्रति उसकी क्रूरता से
लगभग हम सभी परिचित हैं.... परन्तु उस आताताई के मृत्यु
की कहानी बहुत कम लोगों को ही मालूम होगी...! उस आततायी के मौत की कहानी कुछ इस प्रकार है कि....
14वीं और 15वीं शताब्दी में...... गद्दारों के मिलीभगत के
कारण (जैसे आज के ज़माने में सेक्युलर हैं) .... कई युद्धों में हार के
बाद हिन्दू महासभा द्वारा साधू-संतों की अगुवाई में यह
निर्णय लिया गया कि .... अब प्रमुख साधू-
संतों द्वारा व्यक्ति निर्माण का कार्य अपने हाथों में लिए जाए l और... इस पुनीत कार्य हेतु..... बहुत से संतों ने
अपना अपना राष्ट्रीय एवं धार्मिक कर्तव्य निभाते हुए समय-
समय पर शूरवीरों का निर्माण किया l समर्थ गुरु रामदास जी भी इसी श्रेणी में आते हैं...... जिन्होंने
शिवाजी का निर्माण किया l
वहीँ.... प्राण नाथ महाप्रभु जी ने..... बुन्देलखण्ड से छत्रसाल
का निर्माण किया l
और..... ओहम नरेश को श्री राम महाप्रभु....... द्वारा तैयार
किया गया l उस समय तक.... महान हिन्दु सम्राट शिवाजी.... का स्वर्गवास
हो चूका था l
और.... सम्भाजी के अंग-अंग काट कर उनकी नृशंस हत्या ....
औरंगजेब के सामने ही कर दी गई थी l इसके बाद...... हिन्दू महासभा की अगुआई में हम हिन्दुओं के
सामूहिक प्रयास द्वारा...... भारत में चारों और से.....औरंगजेब के
विरुद्ध ...छापामार युद्ध आरम्भ किया गया... जिसमे
की बहुत से धर्म-गुरुओं और साधू-संतों द्वारा समय-समय पर
नीतियाँ और परामर्श भी दिए जाते रहे l यहाँ... मैं आपको यह दिलाना चाहूँगा कि.... औरंगजेब
की सेना इतिहास में सबसे बड़ी सेना मानी जाती है...... धन से
भी और व्यक्तियों से भी l इस तरह....औरंगजेब को मारने के छोटे-छोटे प्रयास
हमेशा ही किये जाते थे ..... परन्तु, वो किस्मत
का भी धनी था… और... शायद भारत के गद्दारों के
निष्ठा का भी l एक बार तो.... मराठा नेता संताजी और धनाजी द्वारा औरंगजेब
के तम्बू की सारी रस्सियाँ ही काट कर तम्बू
ही गिरा दिया गया था......परन्तु , औरंगजेब उस रात
अपनी बेटी के तम्बू में था.... और, उसी के साथ सो रहा था......
जिस कारण वो तो बच गया .... पर बाकी सारे के सारे लोग...
मारे गए l इस अचानक हमले के बाद..... संता जी और
धनाजी की ख्याति भी बहुत बढ़ चुकी थी..... और....
मुस्लिमों में उनका इतना आतंक व्याप्त हो चुका था कि....
यदि कोई घोड़ा पानी भी नहीं पीता था... तो, उसे मुसलमान
कहते थे कि .. क्या तूने संता जी और धना जी को देख लिया है
…. जो डर के मरे पानी नहीं पी रहा है...??? इसी तरह.... बुन्देलखण्ड के वीर छत्रसाल ने सौगंध ली हुई
थी कि..... वे औरंगजेब को.... व्यक्तिगत युद्ध में
अपनी तलवार से हराएंगे ….. और , छत्रसाल महाराज द्वारा ऐसे
कई प्रयास भी किये गए .....परन्तु, अथक प्रयासों के बावजूद
वीर छत्रसाल सफल न हो पाए l अंतत:...... प्राण नाथ महाप्रभु जी ने कहा कि .... औरंगजेब
का जिन्दा रहना ..... एक-एक दिन भारी पड़ रहा है हिन्दुओं
पर.... क्योंकि, जब तक औरंगजेब रोज ढाई मन जनेऊ न
जला लेता था ..... तब तक उसे नींद नहीं आती थी l
अब आप.... इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि .... ढाई मन
जनेऊ एक दिन में जलाने के लिए ..... कितने हिन्दुओं को मारा और सताया जाता होगा.... तथा, कितने बड़े स्तर पर
धर्म परिवर्तन किया जाता होगा..... साथ ही,
कितनी ही औरतों का शारीरिक मान मर्दन
किया जाता होगा.... एवं ... कितने
ही मन्दिरों तथा प्रतिमाओं का विध्वंस
किया जाता होगा ..?????? प्राण नाथ महाप्रभु जी की यह बातें सुन कर....... छत्रसाल जी ने
अपनी सौगंध वापिस लेकर कहा कि .... आप जो कहेंगे मैं
वो करूँगा ... इसीलिए आप दुखी न हों…और , मुझे आदेश दें l जिसके बाद.... प्राणनाथ महाप्रभु जी ने...... एक ख़ास प्रकार के
जहर से युक्त एक खंजर दिया बुन्देलखण्ड को और
सारी योजना समझाते हुए कहा कि .... यह खंजर उस आतताई
औरंगजेब को पूरा नहीं मारना है..अन्यथा ... वो तत्काल प्रभाव से
मर जायेगा ….. अतः ये खंजर केवल उसको एक इंच से भी कम
गहराई का घाव देते हुए..... लम्बा सा एक चीरा ही मारना था ..! जिससे कि .... धीरे धीरे उस जहर का असर फैलेगा..... और,
वो आतताई औरंगजेब तडप-तडप कर मरेगा l और, ख़ुशी कि बात है कि.... बुन्देला वीर छत्रसाल ने इस
कार्य को सफलता पूर्वक अंजाम दिया.... और, जैसा प्राण नाथ
महाप्रभु जी ने कहा था... ठीक उसी प्रकार उसके शरीर पर एक
चीरा दिया…. जिससे ... वो औरंगजेब 3 महीने तक बिस्तर
पर रह कर तड़पता रहा... और, इसी तरह वो तडप तडप कर मरा......
तथा ... उसके पापों का का अंत हुआ l औरंगशाही में औरंगजेब ने स्वयं लिखा है कि... ""मुझे प्राण
नाथ महाप्रभु और छत्रसाल ने धोखे और छल से मारा है ""l अतः.... आप अपने पूर्वजों के इतिहास जो जानें और समझने
का प्रयास करें…. तथा... उनके द्वारा स्थापित किये गए
सिद्धांतों को जीवित रखें l जिस सनातन संस्कृति को जीवित रखने के लिए ..... अखंड
भारत के सीमाओं की रक्षा हेतु हमारे असंख्य पूर्वजों ने अपने
शौर्य और पराक्रम से अनेकों बार अपने प्राणों तक
की आहुति दी गयी हो....उसे हम किस प्रकार आसानी से
भुलाते जा रहे हैं...????? याद रखें..... सीमाएं उसी राष्ट्र की विकसित और सुरक्षित
रहेंगी ….. जो सदैव संघर्षरत रहेंगे l क्योंकि..... जो लड़ना ही भूल जाएँगे..... वो न स्वयं सुरक्षित
रहेंगे....... न ही अपने राष्ट्र को सुरक्षित बना पाएंगे l ...!!! 

Wednesday, May 8, 2013

सही समय

अगर जरुरत से ज्यदा विश्वास कभी कभी ज्यदा खतरनाक होता है

आज सुबह सुबह बुद्धू बक्से ने यह साबित कर दिया अपनों को समझा बुझा कर अपने साथ रखना बहुत जरुरी होता है नहीं तो पुराने बढे बूढ़े कुछ कहावत कह गए है वह आज के दौर मैं भी बिलकुल खरी उतरती है

आप के सबसे बड़ा दुसमन कौन हो सकता है ?

१. अपना सगा भाई ...
२. धरम पत्नी .
३. आपका सबसे करीबी  दोस्त
४. आपका ड्राईवर
५. आपका रसोई बनाने वाला
६. आप खुद

अब काम  की बात ..
१. बीजेपी ने लात मारी मदन लाल खुराना को दिल्ली वालो ने हमेशा के लिए लात मारी बीजेपी को।।।
२. बीजेपी ने कल्याण सिंह को लात मारी यूपी की जनता ने बीजेपी को लात मारी
३. बीजेपी ने येद्दयुरप्पा को लात मारी कर्णाटक की जनता ने बीजेपी को लात मार दी ...

सबको अपनी औकात सही समय पर पता चल जाती है ... अब भी समय है अगर समहल गए तो सम्हाल गए नहीं तो हो गया जय सिया राम ,जय सिया राम ....

जय बाबा बनारस .....

Saturday, May 4, 2013

प्रभु तेरा लाख लाख शुक्र है

एक नगर मे रहने वाले एक पंडित जी की ख्यातिदूर दूर तक थी पास ही के गाँव मे स्थित मंदिर के पुजारी का आकस्मिक निधन होने की वजह से उन्हें वहाँ का पुजारी नियुक्त किया गया था...

एक बार वह अपने गंतव्य की और जानेके लिए बस मे चढ़े उन्होंने कंडक्टर को किराए के रुपये दिए और सीट पर जाकर बैठ गए

कंडक्टर ने जब किराया काटकर रुपये वापस दिए तो पंडित जी ने पाया की कंडक्टर ने दस रुपये ज्यादा उन्हें दे दिए है

पंडित जी ने सोचा कि थोड़ी देर बाद कंडक्टर को रुपये वापस कर दूँगा

कुछ देर बाद मन मे विचार आया की बेवजह दस रुपये जैसी मामूली रकम को लेकर परेशान हो रहे है आखिर ये बस कंपनी वाले भी तो लाखों कमाते है बेहतर है इन रूपयो को भगवान की भेंट समझकर अपने पास ही रख लिया जाए वह इनका सदुपयोग ही करेंगे

मन मे चल रहे विचार के बीच उनका गंतव्य स्थल आ गया बस मे उतरते ही उनके कदम अचानक ठिठके उन्होंने जेब मे हाथ डाला और दस का नोट निकाल कर कंडक्टर को देते हुए कहा भाई तुमने मुझे किराए के रुपये काटने के बाद भी दस रुपये ज्यादा दे दिए थे

कंडक्टर मुस्कराते हुए बोला क्या आप ही गाँव के मंदिर के नए पुजारी हो?

पंडित जी को हामी भरने पर कंडक्टर बोला मेरे मन मे कई दिनों से आपके प्रवचन सुनने की इच्छा है आपको बस मे देखातो ख्याल आया कि चलो देखते है कि मैं ज्यादा पैसे लौटाऊँ तो आप क्या करते हो अब मुझे पता चल गया की आपके प्रवचन जैसा ही आपका आचरण है जिससे सभी को सिख लेनी चाहिए

ये बोलकर कंडक्टर ने गाड़ी आगे बड़ा दी

पंडित जी बस से उतरकर पसीना पसीना थे उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर भगवान से कहा है प्रभु तेरा लाख लाख शुक्र है जो तूने मुझे बचा लिया मैने तो दस रुपये के लालच मे तेरी शिक्षाओ की बोली लगा दी थी पर तूने सही समय पर मुझे थाम लिया....!

जय बाबा बनारस ....

Tuesday, April 30, 2013

अंतरराष्ट्रीय मजबूर दिवस'

डॉ मनमोहन सिंह की दुनिया-भर में फैलती जा रही लोकप्रियता को देखते हुए
 नागरिकों के सैकड़ों संगठनों ने एक स्वर में मांग की है
 कि 'अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस' की तर्ज़ पर 
डॉ सिंह के सम्मान में 'अंतरराष्ट्रीय मजबूर दिवस' भी मनाया जाना चाहिए...

डॉ मनमोहन सिंह की दुनिया-भर में फैलती जा रही और लोकप्रिय लोगो के नाम से डाक टिकट ,सडको के नामकरण,और कोई पुरस्कार सरकार सुरु  करती है जयंती मनाई जाती है कुछ दिवस सुरु किये जाते है जैसे एक मजदूर  दिवस है आप सब लोग जानते है  कुछ लोगो को यह सब सम्मान जीते जी मिल जाता है और कुछ लोगो को मरणोपरांत दिया जाता है 
डॉ सिंह के सम्मान में 'अंतरराष्ट्रीय मजबूर दिवस' भी मनाया जाना चाहिए..
जय बाबा बनारस .....

Monday, April 29, 2013

"आगामी चुनावी स्टेशन

एक सज्जन बनारस पहुँचे। स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक लड़का दौड़ता आया
‘‘मामाजी ! मामाजी !’’—लड़के ने लपक कर चरण छूए।
वे पहचाने नहीं। बोले—‘‘तुम कौन ?’’
‘‘मैं मुन्ना। आप पहचाने नहीं मुझे?’’ ‘
‘मुन्ना ?’’ वे सोचने लगे।
‘‘हाँ, मुन्ना। भूल गये आप मामाजी !
खैर, कोई बात नहीं, इतने साल भी तो हो गये।’’ ‘मैं आजकल यहीं हूँ।’’
‘‘अच्छा।’’
‘‘हां।’’

मामाजी अपने भानजे के साथ बनारस घूमने लगे। चलो, कोई साथ तो मिला। कभी इस मंदिर, कभी उस मंदिर। फिर पहुँचे गंगाघाट। बोले कि सोचा रहा हूँ , नहा लूँ ‘‘जरूर नहाइए मामाजी ! बनारस आये हैं और नहाएंगे नहीं, यह कैसे हो सकता है?’’

मामाजी ने गंगा में डुबकी लगाई। हर-हर गंगे। बाहर निकले तो सामान गायब, कपड़े गायब !
लड़का...मुन्ना भी गायब !
‘‘मुन्ना...ए मुन्ना !’’
मगर मुन्ना वहां हो तो मिले। वे तौलिया लपेट कर खड़े हैं।
‘‘क्यों भाई साहब, आपने मुन्ना को देखा है ?’’ ‘‘कौन मुन्ना ?’’
‘‘वही जिसके हम मामा हैं।’’
लोग बोले ‘‘मैं समझा नहीं।’’
‘‘अरे, हम जिसके मामा हैं वो मुन्ना।’’

वे तौलिया लपेटे यहां से वहां दौड़ते रहे। मुन्ना नहीं मिला।

** ठीक उसी प्रकार ........
भारतीय नागरिक और भारतीय वोटर के नाते हमारी यही स्थिति है मित्रो !
चुनाव के मौसम में कोई आता है और हमारे चरणों में गिर जाता है। मुझे नहीं पहचाना मैं चुनाव का उम्मीदवार। होने वाला एम.पी.।
मुझे नहीं पहचाना ........?

आप प्रजातंत्र की गंगा में डुबकी लगाते हैं।
बाहर निकलने पर आप देखते हैं कि वह शख्स जो कल आपके चरण छूता था, आपका वोट लेकर गायब हो गया।
वोटों की पूरी पेटी लेकर भाग गया।
समस्याओं के घाट पर हम तौलिया लपेटे खड़े हैं।

सबसे पूछ रहे हैं —क्यों साहब, वह कहीं आपको नज़र आया ? अरे वही, जिसके हम वोटर हैं। वही, जिसके हम मामा हैं।
पांच साल इसी तरह तौलिया लपेटे, घाट पर खड़े बीत जाते हैं।.......

"आगामी चुनावी स्टेशन पर ........
भांजे आपका इंतज़ार करेंगे..

जय बाबा बनारस ....
साभार http://www.facebook.com/yogesh.vaidhya?hc_location=stream

सबसे बड़ा कौन!

सबसे बड़ा कौन!
एक बार एक शराबी, शराब पी कर एक मंदिर के बाहर जाता है और पुजारी से बहस करने लगता है।

शराबी: इस दुनिया में मैं सबसे बड़ा।

पुजारी: भाई साहब आप कैसे बड़े ? काफी कुछ सवाल जवाब हुए लेकिन उन सब का निचोड़ आप के सामने है.
...........................................

.................................................




शराबी: वो सबसे बड़ा जो दो बोतल पी कर भी सीधा खडा।

शराबी से बड़ा दुनिया मैं कोई नहीं है और शराबी के लिए दुनिया मैं दारू की बोतल से बड़ा कुछ नहीं है। 

जय बाबा बनारस ....

Saturday, April 27, 2013

अंग्रेज की वो टिपण्णी....

एक अंग्रेज भारत घुमने का आया, घूमते हुए एक चिड़िया घर मैं पहुंचा, बहार एक कुत्ता देख कर भोंका, अंग्रेज ने जेब से कुछ बिस्कुट निकले और कुत्ते को डाल दिए, कुत्ता अंग्रेज के तलवे चाटने लगा, भोंकने की आवाज़ कु कु मैं बदल गई,अंग्रेज चिड़िया घर के अन्दर गया / अंग्रेज को देख पिंजरे मैं बंद जंजीरों मैं जकड़ा एक शेर दहाड़ा,अंग्रेज ने कुछ बिस्कुट निकाले शेर के आगे डाल दिए, शेर मजबूर था ,जंजीरों मैं जकड़ा ,आह भरकर रह गया ,बिस्कुट से मूह फेर लिया !

अंग्रेज ने सिगरेट कश लगते हुए टिपण्णी की, भारत एक ऐसा देश है जहाँ भोकने वाले कुत्ते बाज़ारों मैं खुल्ले घूमते हैं, और दहाड़ने वाले शेरो को जंजीरों मैं कैद करके रखा जाता है, अंग्रेज की वो टिपण्णी आज के राजनीतिक परिवेश पैर सही बैठती है ! भोंकने वाले कुत्ते मतलब देसी मीडिया, और देश के पीएम से लेकर हर छोटा बड़ा नेता एक अंग्रेज औरत के फेंके हुए टूकड़ो को खाकर खुल्ले आम भोंकते हैं, धरम और देश का अपमान करते और आम जनता को इन सब से कोई मतलब ही नहीं है भारत देश एक चिड़िया घर की तरह हो गया है और इन सब की एक रिंग मास्टर है सब के सब उसे के पीछे चल रहे है 


जय बाबा बनारस .....

देश के कुटीर उद्योग

मेरे देश के सभी दूकानदार  भाई लोगो से उम्मीद है की सभी लोग चाइना की बनी हुए वस्तुओ का आज से अभी से खरीद  बंद कर दे 

चाइना का टोटल ३ ८ % उत्पादन को खपत करने वाला देश आप का है आप के देश के कुटीर उद्योग को ख़तम करने मैं  भारत सरकार 

और चाइना का हाथ है .आप के देश के कुटीर उद्योग का खतम कर दिया चाइना ने ...

ब्लॉगर भाई चाइना का माल खरीदना बंद कर दे।।।।।।।

जय बाबा बनारस ........

Tuesday, April 23, 2013

नारी के बिना नर का जीवन अधूरा है ....

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया:।-अथर्ववेद

जिस कुल में नारियों कि पूजा, अर्थात सत्कार होता हैं, उस कुल में दिव्यगुण, दिव्य भोग और उत्तम संतान होते हैं और जिस कुल में स्त्रियों कि पूजा नहीं होती, वहां जानो उनकी सब क्रिया निष्फल हैं।

आज से दस हजार साल पहले आर्य या कहें कि वैदिक काल में नारी की स्थिति क्या थी यह सभी के लिए विचारणीय हो सकता है। नारी की स्थित से समाज और देश के सांस्कृतिक और बौद्धिक स्तर का पता चलता है। यदि नारी को धर्म, समाज और पुरुष के नियमों में बांधकर रखा गया है तो उसकी स्थिति बदतर ही मानी जा सकती है।
किंतु जिन्होंने वेद-गीता पढ़े हैं वे अच्छी तरह जानते हैं कि दस हजार वर्ष पूर्व जबकि मानव जंगली था, आर्य पूर्णत: एक सभ्य समाज में बदल चुके थे। तभी तो वेदों में जो नारी की स्थिति का वर्णन है उससे पता चलता है कि उनकी स्थिति आज के समाज से कहीं अधिक आदरणीय और स्वतंत्रतापूर्ण थी।

नारी की स्थिति :
1.वैदिक काल में कोई भी धार्मिक कार्य नारी की उपस्थिति के बगैर शुरू नहीं होता था। उक्त काल में यज्ञ और धार्मिक प्रार्थना में यज्ञकर्ता या प्रार्थनाकर्ता की पत्नी का होना आवश्यक माना जाता था।

2.नारियों को धर्म और राजनीति में भी पुरुष के समान ही समानता हासिल थी। वे वेद पढ़ती थीं और पढ़ाती भी थीं। मैत्रेयी, गार्गी जैसी नारियां इसका उदाहरण है। ऋग्वेद की ऋचाओं में लगभग 414 ऋषियों के नाम मिलते हैं जिनमें से 30 नाम महिला ऋषियों के हैं। यही नहीं नारियां युद्ध कला में भी पारंगत होकर राजपाट भी संभालती थी।

3.शतपथ ब्राह्मण में कहा गया है कि सनातन वैदिक हिन्दू धर्म  नारी के बिना नर का जीवन अधूरा है इस अधूरेपन को दूर करने और संसार को आगे चलाने के लिए नारी का होना जरूरी है। नारी को वैदिक युग में देवी का दर्जा प्राप्त था।

4.ऋग्वेद में वैदिक काल में नारियां बहुत विदुषी और नियम पूर्वक अपने पति के साथ मिलकर कार्य करने वाली और पतिव्रत धर्म का पालन करने वाली होती थी। पति भी पत्नी की इच्छा और स्वतंत्रता का सम्मान करता था।

5.वैदिक काल में वर तलाश करने के लिए वधु की इच्छा सर्वोपरि होती थी। फिर भी कन्या पिता की इच्छा को भी महत्व देती थी। यदि पिता को कन्या के योग्यवर नहीं लगता था तो वह पिता की मर्जी को भी स्वीकार करती थीं।

6.बहुत-सी नारियां यदि अविवाहित रहना चाहती थीं तो अपने पिता के घर में सम्मान पूर्वक रहती थी। वह घर परिवार के हर कार्य में साथ देती थी। पिता की संम्पति में उनका भी हिस्सा होता था।

7.सनातन वैदिक हिन्दू धर्म में जहां पुरुष के रूप में देवता और भगवानों की पूजा-प्रार्थना होती थी वहीं देवी के रूप में मां सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा का वर्णन मिलता है। वैदिक काल में नारियां मां, देवी, साध्वी, गृहिणी, पत्नी और बेटी के रूप में ससम्मान पूजनीय मानी जाती थीं।

8.बाल विवाह की प्रथा तब नहीं थी। नारी को पूर्ण रूप से शिक्षित किया जाता था। उसे हर वह विद्या सिखाई जाती थी जो पुरुष सीखता था- जैसे वेद ज्ञान, धनुर्विद्या, नृत्य, संगीत शास्त्र आदि। नारी को सभी कलाओं में दक्ष किया जाता था उसके बाद ही उसके विवाह के संबंध में सोचा जाता था। इसके कई उदाहरण मिल जाएंगे।

ऐसे हुआ नारी का पतन :
महाभारत युद्ध के बाद नारी का पतन होना शुरू हुआ। इस युद्ध के बाद समाज बिखर गया, राष्ट्र राजनीतिक शून्य हो गया था और धर्म का पतन भी हो चला था। युद्ध में मारे गए पुरुषों की स्त्रीयां विधवा होकर बुरे दौर में फंस गई थी।

राजनीतिक शून्यता के चलते राज्य असुरक्षित होने लगे। असुरक्षित राज्य में अराजकता और मनमानी बढ़ गई। इसके चलते नारियां सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और सांस्कृतिक शोषण की शिकार होने लगी। फिर भी यह दौर नारियों के लिए उतना बुरा नहीं था जितना की मध्य काल रहा।

पुराने समय में पुरुष के साथ चलने वाली नारी मध्य काल में पुरुष की सम्पति की तरह समझी जाने लगी। इसी सोच के चलते नारियों की स्वतंत्रता खत्म हो गई। मध्य काल में नए नए जन्मे तथाकथित धर्मों ने नारी को धार्मिक तौर पर दबाना और शोषण करना शुरू किया।

धर्म और समाज के जंगली कानून ने नारी को पुरुष से नीचा और निम्न घोषित कर उसे उपभोग की वस्तु बनाकर रख दिया। वैदिक युग की नारी धीरे-धीरे अपने देवीय पद से नीचे खिसकर मध्यकाल के सामन्तवादी युग में दुर्बल होकर शोषण का शिकार होने लगी।

तथाकथित मध्यकालीन धर्म ने नारी को पुरुर्षों पर निर्भर बनाने के लिए  उसके मूल अधिकारों पर प्रतिबंध लगाकर पुरुष को हर जगह बेहतर बताकर नारी के अवचेन में शक्तिहीन होने का अहसास जगाया गया जिसके चलते उसे आसानी से विद्याहीन, साहसहीन कर दिया जाए। समाज, देश और धर्म के ‍नारी को अनुपयोगी बनाया गया ताकि वह अपने जीवन यापन, इज्जत और आत्मरक्षा के लिए पूर्णत: पुरुष पर निर्भर हो जाए।

इस सभी तरह के भय और दहशत के माहौल के चलते हिन्दुओं में भी पर्दाप्रथा, बाल विवाह प्रथा और नारियों को शिक्षा से दूर रखने का चलन बढ़ गया।

हे नारी! तू स्वयं को पहचान। तू शेरनी हैं, तू शत्रु रूप मृगों का मर्दन करने वाली हैं, देवजनों के हितार्थ अपने अन्दर सामर्थ्य उत्पन्न कर.। हे नारी! तू अविद्या आदि दोषों पर शेरनी की तरह टूटने वाली हैं, तू दिव्य गुणों के प्रचारार्थ स्वयं को शुद्ध कर। हे नारी! तू दुष्कर्म एवं दुर्व्यसनों को शेरनी के समान विश्वंस्त करने वाली हैं, धार्मिक जनों के हितार्थ स्वयं को दिव्य गुणों से अलंकृत कर।

जय बाबा बनारस ...

Saturday, April 20, 2013

एक छोटा प्रयास....

एक छोटा प्रयास बड़ी दुर्घटनाओ को टाल देता है बूढ़े सज्जन रोड पर चले जा रहे थे तभी डगमगाए फिर सम्हल गए,
 पैरो में एक प्लास्टिक की रस्सी फस गयी थी । उन्होंने उस रस्सी को लपेटा और जाकर कूड़ेदान में डाल दिया,
 पास ही बैठा रिक्शा वाला मुस्कुरा रहा था । वो बोला बाबू जी ये कूड़ा तो रोज़ ही पड़ा रहता है कहा आप चक्कर में पड़े हो ।
 वो बड़े शांत स्वर में बोले "बेटा मैं तो गिर गया लेकिन कोशिश होती है और लोग गिरने से बच जाये ।"
 उनका जबाब सुनकर मैं और रिक्शावाला दोनों अभिभूत हो गए ।
 ऐसे लोग भी दुनिया में है जिनमे नैतिकता अभी कूट कूट कर भरी है,
 ये मेरी बुजुर्ग पीढ़ी जो आज के युवाओ को सीख देती है ।
 अब मैंने भी उनका अनुसरण करना शुरू कर दिया रोड पर पड़ी कील और फंदे वाली रस्सी मैं किनारे कर देता हूँ -
 जिससे लोगो को तकलीफ न हो - एक छोटा प्रयास बड़ी दुर्घटनाओ को टाल देता है, हो सके तो आप लोग भी इसका अनुसरण करे .. . . . . . .


जय बाबा बनारस ....

Wednesday, April 17, 2013

सत्तारूढ़ मद मे चूर

1.कश्मीर हिन्दुओ से खाली हो गया उस का जिम्मेदार कौन है?? कांग्रेस...

2.1983 फ़रवरी असम में सांप्रदायिक हिंसा 2000 हिंदु को मार डाला प्रधानमंत्री – इंदिरा गांधी.
जिम्मेदार कौन है?? कांग्रेस..

3.अप्रैल – मई 1987- 81 हिंदु मारे गए मेरठ, उत्तर प्रदेश में - सत्तारूढ़ पार्टी - कांग्रेस...

4.जुलाई 1986 में मुसलमानों ने अहमदाबाद में सांप्रदायिक हिंसा 59 हिंदुओको मार डाला – सत्तारूढ़ पार्टी - कांग्रेस

5.अप्रैल 1985 में मुसलमानों ने अहमदाबाद में सांप्रदायिक दंगों में 3000 हिंदुओ को मारा गया – सत्तारूढ़ पार्टी - कांग्रेस

6.अक्टूबर 1984 दिल्ली में साम्प्रदायिक दंगों में मुसलमानों ने 2733हिंदुओ को मार डाला – सत्तारूढ़ पार्टी - कांग्रेस

7.मई 1984 भिवंडी में साम्प्रदायिक दंगों में मुसलमानों ने 146 हिंदुओ को मार डाला, – सत्तारूढ़ पार्टी – कांग्रेस

8.अगस्त १९८० मुरादाबाद साम्प्रदायिक दंगों में लगभग मुसलमानों ने 2000 हिंदुओ को मार डाला – सत्तारूढ़ पार्टी – कांग्रेस

9.1970 महाराष्ट्र में भिवंडी सांप्रदायिक दंगों में मुसलमानों ने लगभग 80 हिंदु मारे गए – सत्तारूढ़ पार्टी - कांग्रेस

10.1969 अहमदाबाद में सांप्रदायिक दंगों में मुसलमानों ने 512 से अधिक हिंदुओ को मार डाला सत्तारूढ़ पार्टी – कांग्रेस

11.1967 अगस्त रांची में सांप्रदायिक दंगों में मुसलमानों ने 200 हिंदुओ को फिर मारा गया – सत्तारूढ़ पार्टी - कांग्रेस

12.बंगाल 1947 में सांप्रदायिक दंगों में मुसलमानों ने 5000 हिंदुओ मार डाला – सत्तारूढ़ पार्टी - कांग्रेस

13.राउरकेला और जमशेदपुर में 1964 के सांप्रदायिक दंगों में मुसलमानों ने 2000 हिंदुओ को मार डाला. सत्तारूढ़ पार्टी - कांग्रेस

सेकुलर हिंदुधर्मविरोधी प्राणी है कृपया इनका बहिष्कार करें.

जय बाबा बनारस ....

Tuesday, April 16, 2013

बनारसी चुस्की


बनारसी चुस्की एक बनारसी की वाल से
पान की दुकान के बाहर बड़ी चहल -पहल थी ! कुछ लोग पान खा रहे थे कुछ सिगरेट पी रहे थे ! कुछ आपस मैं बतिया रहे थे ,

तभी एक थप्पड़ की आवाज़ गूंजी १ एक युवक ने दुसरे को थप्पड़ मार दिया ,हंगामा हो गया !लोग इकट्ठे हो गए ,एक ने पूछा क्यों मारा इसे !
थप्पड़ मारने वाला युवक- देश में इतनी महंगाई है !

दूसरा युवक -लेकिन थप्पड़ क्यों मारा ?

युवक-दिन दहाड़े बहु बेटियों की इज्ज़त लूट रही है !

एक बूढी औरत- लेकिन थप्पड़ क्यों मारा ?
युवक-चार राज्यों मैं सुखा पड़ा है !

एक बूढा-भाई लेकिन थप्पड़ क्यों मारा ?

युवक-बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता !

पान वाला - लेकिन इस को थप्पड़ क्यों मारा ?

एक और जोरदार आवाज़ गूंजी अबकी बार थप्पड़ पान वाले को लगा !

लोग-अब इसको क्यों मारा ?
युवक- ये सब जानता है फिर भी पूछ रहा है क्यों मारा???
एक बहुत बजुर्ग- बेटा अब तुम बता ही दो क्यों मारा ?

युवक- चच्चा देश मैं इतने मुद्दे हैं और इ साला मुझसे पूछता है स्कोर क्या हुआ है बस इसलिए मारा।


जय बाबा बनारस ...

Monday, April 8, 2013

रोटी में जहर

एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोजाना भोजन
पकाती थी और एक रोटी वह वहां से ...गुजरने वाले
किसी भी भूखे के लिए पकाती थी ,
वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी जिसे
कोई भी ले सकता था .
एक कुबड़ा व्यक्ति रोज उस रोटी को ले जाता और वजाय
धन्यवाद देने के अपने रस्ते पर चलता हुआ वह कुछ इस तरह
बडबडाता "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और
जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा "
दिन गुजर...ते गए और ये
सिलसिला चलता रहा ,वो कुबड़ा रोज रोटी लेके
जाता रहा और इन्ही शब्दों को बडबडाता
"जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम
अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा "
वह औरत उसकी इस हरकत से तंग आ गयी और मन ही मन
खुद से कहने लगी कि "कितना अजीब व्यक्ति है ,एक शब्द
धन्यवाद का तो देता नहीं है और न जाने
क्या क्या बडबडाता रहता है ,
मतलब क्या है इसका ".
एक दिन क्रोधित होकर उसने एक निर्णय लिया और
बोली "मैं इस कुबड़े से निजात पाकर रहूंगी ".
और उसने क्या किया कि उसने उस रोटी में जहर
मिला दीया जो वो रोज उसके लिए बनाती थी और जैसे
ही उसने रोटी को को खिड़की पर रखने कि कोशिश
कि अचानक उसके हाथ कांपने लगे और रुक गये और वह
बोली "
हे भगवन मैं ये क्या करने जा रही थी ?" और उसने तुरंत उस
रोटी को चूल्हे कि आँच में जला दीया .एक
ताज़ा रोटी बनायीं और खिड़की के सहारे रख दी ,
हर रोज कि तरह वह कुबड़ा आया और रोटी लेके "जो तुम
बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे
वह तुम तक लौट के आएगा " बडबडाता हुआ चला गया इस
बात से बिलकुल बेखबर कि उस महिला के दिमाग में क्या चल
रहा है .
हर रोज जब वह महिला खिड़की पर रोटी रखती थी तो वह
भगवान से अपने पुत्र कि सलामती और अच्छी सेहत और घर
वापसी के लिए प्रार्थना करती थी जो कि अपने सुन्दर
भविष्य के निर्माण के लिए कहीं बाहर गया हुआ
था .महीनों से उसकी कोई खबर नहीं थी.
शाम को उसके दरवाजे पर एक दस्तक होती है ,वह
दरवाजा खोलती है और भोंचक्की रह जाती है ,
अपने BETE को अपने सामने खड़ा देखती है.वह पतला और
दुबला हो गया था. उसके कपडे फटे हुए थे और वह
भूखा भी था ,भूख से वह कमजोर हो गया था. जैसे ही उसने
अपनी माँ को देखा,
उसने कहा, "माँ, यह एक चमत्कार है कि मैं यहाँ हूँ. जब मैं
एक मील दूर है, मैं इतना भूखा था कि मैं गिर. मैं मर
गया होता,
लेकिन तभी एक कुबड़ा वहां से गुज़र रहा था ,उसकी नज़र
मुझ पर पड़ी और उसने मुझे अपनी गोद में उठा लीया,भूख के
मरे मेरे प्राण निकल रहे थे
मैंने उससे खाने को कुछ माँगा ,उसने नि:संकोच
अपनी रोटी मुझे यह कह कर दे दी कि "मैं हर रोज
यही खाता हूँ लेकिन आज मुझसे ज्यादा जरुरत इसकी तुम्हें है
सो ये लो और अपनी भूख को तृप्त करो " .
जैसे ही माँ ने उसकी बात सुनी माँ का चेहरा पिला पड़
गया और अपने आप को सँभालने के लिए उसने दरवाजे
का सहारा लीया ,
उसके मस्तिष्क में वह बात घुमने लगी कि कैसे उसने सुबह
रोटी में जहर मिलाया था
.अगर उसने वह रोटी आग में जला के नष्ट
नहीं की होती तो उसका बेटा उस रोटी को खा लेता और
अंजाम होता उसकी मौत
और इसके बाद उसे उन शब्दों का मतलब बिलकुल स्पष्ट
हो चूका था
"जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम
अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा।
" निष्कर्ष "
~हमेशा अच्छा करो और अच्छा करने से अपने आप
को कभी मत रोको फिर चाहे उसके लिए उस समय
आपकी सराहना या प्रशंसा हो या न हो .
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जय बाबा बनारस ....

Tuesday, April 2, 2013

गाय और हाथी....

एक जंगल में गाय भागती हुई जा रही थी हाथी ने उसे रोक के उससे भागने का कारण पुछा गाय ने कहा
 जंगल के सारे  बैलो को पकड़ने का आदेश आया है ।
हाथी ने कहा :- तुम क्यों भाग रही हो तुम तो गाय हो ।

गाय ने कहा :- मैं गाय तो हु लेकिन अगर मुझे पकड़ लिया तो २० साल मुझे ये साबित करने में लग जाएगा की मैं गाय हु ।

ये सुन कर गाय और हाथी साथ साथ भागने लगे ।


आज सम्पूर्ण विश्व में अगर इस प्रकार आक्रमक रुख अपनाने की जरुरत सबसे ज्यादा किसी देश को है तो वो हैं हमारा भारत देश | लेकिन ये हमारा दुर्भाग्य है की देश की सत्ता उन चंद भूखे और नीच लोगों के हाथ में है जिन्हें हमारी संस्कृति से न तो कोई मतलब है न ही उन्हें इसकी महानता का ज्ञान है | और उससे भी दुर्भाग्यपूर्ण है आम जनता का सुस्त रवैया और हर ज़ुल्म को चुपचाप सहना |


जय बाबा  बनारस ......

Saturday, March 31, 2012

अभी मैं व्यस्त हु बाद मैं मिलेंगे



एक लड़के ने मरने से पहले दो मेसेज किये पहला मेसेज अपनी गर्ल फ्रेंड को और दूसरा अपने मित्र को


की मैं जा रहा हु जवाब जल्द दे 
१.पहला जवाब गर्ल फ्रेंड का आया अभी मैं व्यस्त हु बाद मैं मिलेंगे ..यह जवाब पढ़ कर लड़के को बहुत दर्द हुआ ..
२.दूसरा जवाब दोस्त का आया अबे कहा जा रहा रुक अकेले अकेले थोडा रुक मैं भी आ रहा हु ..
 दूसरा जवाब पढ़ कर लड़का मुस-करा कर बोला की आज फिर प्यार दोस्त से हार गया ..
लड़का जान गया कि मित्रता प्यार से बढ़ कर है..



आप कि क्या कहना है...


जय बाबा बनारस...

Sunday, February 27, 2011

विवाद का स्वाद-------

विवाद का स्वाद आज कल कुछ ब्लॉग पर जा कर देखा कि कुछ लोग 
अपने अपने ब्लॉग पर कुछ न कुछ विवादों को जनम देकर 
अपने 
बहुत उच्च कोटि के विचार रखते है और लोग बाग़ बहुत मजे ले ले कर 
टीप देते है कभी कोइए खुश कभी कोइए नाराज ---
जैसे आप कि जीभ को स्वाद लग जाता है 
कि उसका स्वाद बहुत आच्छा है 
ठीक उसी तरह कुछ लोगो को मानसिक स्वाद कि जरुरत होती है ,
तो वोह लोग कुछ न कुछ आईसा लिखते है 
कि कोइए न कोइए नया विवाद सुरु हो जाता है 
और उनकी मानसिक खुराक पूरी हो जाती है ----
जय बाबा बनारस-----------