Monday, September 27, 2010

कोरा कागज आपका मन

जिंदगी एक तरह से कोरे कागज की तरह होती ही .जिस तरह से आप कोरे काजग पर कुछ भी लिख सकता ही कुछ भी लाइन खीच सकते ही कोइए भी कार्टून बना सकते ही अपने सपने को कागज पर सजीव कर सकते ही,
ठीक उसी तरह आप की जिंदगी है.आप जो बनाना चाहते है उसको ठीक उसी प्रकार से बना सकते है
जिंदगी एक तरह से सपनों का संसार है ,आप कैसे सपने देखेते है यह सब आप पर निर्भर करता है ,
आप जो सोचते है कभी कभी वैसा ही होता है ,
कभी कभी आप जैसा सोचेते है ठीक उसका उल्टा होता है ,
आप के मन माफिक हो गया तब सब ठीक है ,
नहीं तो आप कहते है की जिंदगी नरक है ,जिंदगी स्वर्ग है य नरक है यह सब आप को तय करना है ,
एक छोटीसी कहानी है ,
एक आदमी सुबह सुबह तैयार होकर ऑफिस जाने को निकला बहार निकलते ही उसके उपर किसी पक्षी नै बीत कर दी ,किसी नै कह यार यह तो बड़ा आच्छा नहीं हुआ ,
वोह आदमी जिसके उपर बीत गिरी थी बोला यार यह तो बहुत ही आच्छा हुआ
की गाय और भेस को उड़ना नहीं आता नहीं तो आज पता नहीं क्या हुआ होता
जिंदगी एक कोरा कागज है ,आप जिन्दादील्ली से जीते है या घुट घुट कर जीते है यह सब आप के उपर है

4 comments:

  1. bilkul sahi.... sab hamare hi haath hai... prerna dene wali skaratmak post

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  2. सच है .... जैसी रही भावना ..... सोच जैसी ... विचार वैसा ...

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  3. सही कहा आपने.

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