Friday, November 12, 2010

आप ब्लॉग पर है एक बार मुस्कराना है

मुस्कराना एक आर्ट है हर आदमी मुस्करा नहीं सकता है
मुस्कराना भी एक कला है
सबका मुस्कराने का एक अलग अंदाज होता है
कोई किसी के मुस्कान पर ही अपने पूरी जिन्दाजी दाव पर लगा देता है
पुराने लोग कहते है मुस्कराने के वक़्त बत्तस्सी नज़र नहीं आणि चाहिए
हँसना और मुस्कराने में बहुत फर्क है
आप गला फाड़ कर हँस सकते है
लेकिन मुस्करा --------सकते है
कोइए फत्तू पर हँसता है ,
कोई संता पर हसता है
कोइए ढक्कन और मक्खन पर हँसता है
कोई हम पर भी हँसता है ------
जिंदगी में मुस्कराना जरुरी है
मुस्कराना ही जिंदगी है

15 comments:

  1. हमने भी अब डाल ली है आदत मुस्कराने की

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  2. bahut khoob.ye aadat hai muskarane ki.

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  3. मुस्कराना ही जिंदगी है
    मुस्करा रहा हूँ

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  4. आज के जमाने में मुस्कुराने की नोबत कम ही आती है लेकिन आप कह रहे हैं तो चलिए मुस्कुरा ही देते हैं।

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  5. जबरदस्त पोस्ट, मिश्रा जी। इतने मुश्किल समय में जो पल मुस्कुराने के मिल जायें, बटोर लेने चाहियें।

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  6. आज के जमाने में मुस्कुराने की नोबत कम ही आती है लेकिन आप कह रहे हैं तो चलिए मुस्कुरा ही देते हैं।

    aap muskare hamari post safal.

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  7. इतने मुश्किल समय में जो पल मुस्कुराने के मिल जायें, बटोर लेने चाहियें।
    muskarahat ka koie mol nahi hai.
    batore lo jitani batore sakate ho-----

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  8. वाह मिश्र जी,........

    आपकी इसी अदा पर मुद्दत के बाद देखो आज हम भी मुस्कुरा उठे......

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  9. कोई खुद पर ही हँसता है और सबसे अच्छी वही हंसी होती है |

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  10. हम तो मुस्कुरा रहे हैं…………यही ज़िन्दगी है।

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  11. आपकी रचना यकीनन चेहरे पर मुस्कान ले आई ... बहुत सुंदर रचना .. ...

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  12. हम तो पोस्ट पढ़ कर ही मुस्करा दिए

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