कुरबानी तो बडे पुण्य का काम
सच मुच कुरबानी तो बडे पुण्य का काम
आज कल कौन क़ुरबानी नहीं दे रहा है
आज कल हर आदमी क़ुरबानी दे रहा है।
एक बाप अपने बच्चओ की खातिर पता नहीं किस किस की क़ुरबानी देता है
एक पत्नी पता नहीं किस किस के क़ुरबानी देती है
एक कहावत है तुझ पे मै कुर्बान
आज कल सब स्वार्थ की क़ुरबानी है।
कुरबानी तो बडे पुण्य का काम
कोइए धरम के नाम पर कुर्बान है
कोइए शर्म के नाम पर कुर्बान है
कुर्सी की क़ुरबानी कोइए नहीं देता है.