Sunday, October 17, 2010

नल की टूटी टपक रही है

नल की टूटी टपक रही है ,
नल की टूटी टपक रही ,
नल की टूटी टपक रही है ,
हमने कहा क्या बात है
बोली नल की टूटी टपक रही है
आप किसी प्लुम्बेर को बुला कर इसको ठीक करा दे,
हमने कहा करै देंगे इस बात को धीरे धीरे चार माह हो गए
आज भी नल की टूटी टपक रही है ,
सुबह सुबह श्रीमती जी बोली आज नल की टूटी ठीक हो जानी चाहिय
हमने कहा सब ठीक
जब हम प्लुम्बेर को लाकर आये टूटी ठीक हो गयी
फिर हमारा दिमाग नल की टूटी पर गया की आखिर नल की टूटी को ठीक करने में इतना टाइम कियु लगाया
पानी की तो एक एक बूद कीमती है जल ही जीवन है ,जल है तो कल है
पानी की एक बूद अगर लगातार टपकती रहे तो पुरे एक दिन में १५०-लीटर पानी बह जाता है
आओ हम सब मिल कर पानी की एक एक नन्ही सी बूद को बचाए ---
अमृत की एक बूँद ही काफी होती है जीवन के liye
आप के विचार सादर अमन्त्रतित है-------

5 comments:

  1. पानी की तो एक एक बूद कीमती है जल ही जीवन है ,जल है तो कल है
    .....दुनिया का कटु शाश्वत वास्तविक सत्य ..

    विजयादशमी की बधाई एवं शुभकामनाएं

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
    भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोsस्तु ते॥
    विजयादशमी के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

    काव्यशास्त्र

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  3. सच बात है हम बड़ी बातों में जीवन कि छोटी छोटी बातों को अहमियत नहीं देते ...

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  4. पर ये भूल जाते है कि ये छोटी बाते कितनी बड़ी बन सकती है

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