Tuesday, November 23, 2010

इन्तिज़ार का मज़ा जो है वोह किसी भी मजे से कम नहीं है

कुछ दिन पहले एक गाना सुना था की इश्क और प्यार का मजा --------
और थोडा इन्तिज़ार का मज़ा -------
गाना पहली बार में तो कुछ समझ में हे नहीं आया
आज उस गाने का मतलब समझ आया
आज हम किसी का इन्तिज़ार कर रहे है
सुबह से हो गए शाम लेकिन वो नहीं आये
अब का करे कुछ समझ ही नहीं आ रहा है
तब सोचा की आज यही लिख दे -------
बाकी जो भी आप के सुझाव हो सर माथे
जय राम जी की

3 comments:

  1. "machchharon ne noch dali deh poori raat bhar
    hamko unka 'wait' karne ka maza mil hi gaya"
    asli maza to intzar me hi hai!

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  2. जी हमारा भी... जय राम जी की...

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